3 साल की लिमिट पर 13 साल तक जमी रही पुलिस! लखनऊ के मानवाधिकार आयोग में घपले की बू, शासन ने मांगी रिपोर्ट

लखनऊ से सामने आया एक मामला अब शासन के स्तर तक पहुंच गया है। मामला ऐसी व्यवस्था से जुड़ा है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के बाद शासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह पता चलेगा कि लंबे समय तक चली इन तैनातियों के पीछे क्या नियम और आदेश लागू थे।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 18 September 2026, 12:01 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अनुसंधान दल में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर शिकायत सामने आई है। शिकायत में आयोग में पहले तैनात रहे एक पूर्व पुलिस महानिदेशक और उनके अधीनस्थ अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।

शिकायत में तैनाती और संबद्धता की अवधि के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए शासन के गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 ने जांच के आदेश दिए हैं। शासन की ओर से आयोग के सचिव को पत्र भेजकर शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की नियमानुसार जांच कराने और इसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व इंस्पेक्टर ने की शिकायत

लखनऊ निवासी शीतांशु पटेल मानवाधिकार आयोग के अनुसंधान दल में कार्यरत रहे हैं। वह इसी साल इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने शासन को दी शिकायत में आयोग में पुलिसकर्मियों की लंबे समय तक संबद्धता का मुद्दा उठाया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, मानवाधिकार आयोग और अन्य अल्पकालिक इकाइयों में प्रतिनियुक्ति या संबद्धता की सामान्य अवधि तीन वर्ष निर्धारित है। विशेष परिस्थितियों और अर्हता के आधार पर विभागाध्यक्ष की अनुशंसा से इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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11 से 13 साल तक संबद्धता का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद आयोग के अनुसंधान दल में कुछ पुलिसकर्मियों को 11 से 13 साल तक संबद्ध रखा गया। शिकायतकर्ता ने इसे निर्धारित व्यवस्था के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत के साथ पुलिस मुख्यालय और शासन के अलग-अलग आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।

इनमें वर्ष 2008, 2013, 2015, 2019 और 2023 से जुड़े आदेश शामिल बताए गए हैं। इन आदेशों में बहराइच, प्रतापगढ़, अयोध्या और लखनऊ समेत अलग-अलग जिलों से उप निरीक्षकों और आरक्षियों के स्थानांतरण या संबद्धता से संबंधित जानकारी होने की बात कही गई है।

शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट

गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 के उप सचिव अजीत कुमार सिन्हा ने आयोग के सचिव को पत्र भेजकर शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जांच में यह देखा जाना है कि संबंधित पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक आयोग में किस आदेश के तहत संबद्ध रखा गया और इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि तैनाती के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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जांच में स्पष्ट होगी आरोपों की स्थिति

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के आदेश के बावजूद लंबे समय से मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और फाइल लंबित पड़ी है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल शासन ने मामले में जांच और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तैनाती और संबद्धता में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और वित्तीय अनियमितता के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Location :  Lucknow

Published :  18 September 2026, 12:01 PM IST

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