शिकायत से शुरू हुई जांच, फिर आया नया मोड़; हाईकोर्ट ने IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ विजिलेंस जांच रद्द की

आईएएस अभिषेक प्रकाश के खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रद्द कर दिया है। मामला 2025 में एक औद्योगिक परियोजना से जुड़ी शिकायत के बाद शुरू हुआ था। बाद में शिकायतकर्ता ने हलफनामे में शिकायत को भ्रम और गलतफहमी का परिणाम बताया था।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 18 September 2026, 12:13 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बड़ा आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने अभिषेक प्रकाश के खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच को रद्द कर दिया। कोर्ट ने 20 मार्च और 28 मार्च 2025 को सरकार की ओर से जारी संबंधित आदेशों को भी निरस्त कर दिया।

शिकायत से शुरू हुआ था पूरा मामला

मामला एक औद्योगिक परियोजना की मंजूरी से जुड़ी शिकायत का है। 20 मार्च 2025 को एक कंपनी के अधिकारी बिस्वजीत दत्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन्वेस्ट यूपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें निकांत जैन का मोबाइल नंबर दिया था।

शिकायत के अनुसार, परियोजना को एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से मंजूरी दिलाने के लिए निकांत जैन के माध्यम से संपर्क करने को कहा गया था। आरोप था कि जैन ने परियोजना की कुल लागत का पांच फीसदी हिस्सा मांगा। इस शिकायत के बाद निकांत जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, जबकि तत्कालीन इन्वेस्ट यूपी सीईओ और औद्योगिक विकास विभाग के सचिव अभिषेक प्रकाश के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और विजिलेंस जांच शुरू हुई।

बाद में शिकायत को लेकर आया बड़ा मोड़

मामले में बाद में कंपनी अधिकारी बिस्वजीत दत्ता ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने कहा कि 20 मार्च 2025 को की गई शिकायत भ्रम और गलतफहमी के कारण हुई थी।

दत्ता के मुताबिक, उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि परियोजना से जुड़ी जमीन की उपलब्धता और बिजली से संबंधित कुछ जानकारी के लिए YEIDA और UPPCL से रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। बाद में जरूरी जानकारी मिलने के बाद परियोजना के प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया के लिए रखने की सिफारिश की गई थी।

हाईकोर्ट ने प्रक्रिया पर भी की टिप्पणी

हाईकोर्ट के सामने यह भी तर्क रखा गया कि मूल शिकायत के साथ शपथपत्र नहीं लगाया गया था। कोर्ट ने मामले में विजिलेंस जांच शुरू करने की प्रक्रिया पर भी गौर किया।

अदालत के मुताबिक, शिकायत मिलने के उसी दिन विभागीय कार्रवाई और विजिलेंस जांच शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित प्रक्रिया के तहत राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी समेत जरूरी औपचारिकताओं का पालन किया जाना चाहिए था।

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निकांत जैन के मामले में भी पहले आ चुका है फैसला

इसी मामले से जुड़े निकांत जैन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को लेकर भी फरवरी 2026 में हाईकोर्ट का आदेश आया था। अदालत ने शिकायतकर्ता के बाद के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था। सितंबर 2026 का ताजा आदेश अभिषेक प्रकाश के खिलाफ शुरू की गई विजिलेंस जांच और संबंधित सरकारी आदेशों से जुड़ा है।

अभिषेक प्रकाश को मिली कानूनी राहत

अभिषेक प्रकाश ने अपने खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए विजिलेंस जांच की पूरी कार्यवाही और संबंधित सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया।

इस आदेश के बाद 2025 में औद्योगिक परियोजना से जुड़ी शिकायत के आधार पर शुरू हुई अभिषेक प्रकाश के खिलाफ विजिलेंस जांच का मामला समाप्त हो गया है। हालांकि, कोर्ट का आदेश मामले में दर्ज आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बजाय जांच शुरू करने की वैधानिक प्रक्रिया और शिकायतकर्ता के बाद के रुख पर आधारित है।

Location :  Lucknow

Published :  18 September 2026, 12:13 PM IST

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