UNHRC में पाकिस्तान को बड़ा झटका, जल विशेषज्ञों ने सिंधु जल संधि पर किया भारत का खुला समर्थन

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय जल विशेषज्ञों और वक्ताओं ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले को पूरी तरह जायज ठहराया है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 18 September 2026, 11:26 AM IST
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New Delhi: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा का विषय बन गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान आयोजित एक सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने संधि के संबंध में भारत के रुख पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले को क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि इस मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के दावे अलग-अलग हैं।

सिंधु जल संधि पर 1960 में किए गए थे हस्ताक्षर

सिंधु नदी प्रणाली के जल के बंटवारे से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। विश्व बैंक ने इस समझौते में मध्यस्थता की थी। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद पिछले साल भारत ने संधि को निलंबित करने का फैसला किया। भारत के इस कदम को पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद का समर्थन करने के आरोपों से जोड़ा गया था।

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विशेषज्ञ ने संधि की समीक्षा के अधिकार की पुष्टि की

ब्रसेल्स स्थित साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम के रिसर्च डायरेक्टर सिगफ्राइड वोल्फ ने सम्मेलन में कहा कि भारत को 1960 की संधि की समीक्षा की मांग करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के व्यवहार ने संधि की मूल भावना और उद्देश्यों को कमजोर किया है। संधि को भारत द्वारा दी गई एक बड़ी रियायत बताते हुए वोल्फ ने जल-बंटवारे की व्यवस्था में मौजूद असमानताओं पर भी प्रकाश डाला।

भारतीय परियोजनाओं के संबंध में पाकिस्तान के आरोपों पर सवाल

वोल्फ ने पाकिस्तान के इस आरोप को खारिज कर दिया कि भारत पश्चिमी नदियों से पानी के प्रवाह में बाधा डाल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की जल परियोजनाएं मुख्य रूप से जलविद्युत उत्पादन के लिए बनाई गई हैं और इनसे पानी को नीचे की ओर बहने दिया जाता है। बगलिहार, किशनगंगा और रातले जैसी परियोजनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन्हें लेकर लंबे समय से कानूनी और तकनीकी विवाद रहे हैं।

पाकिस्तान के जल प्रबंधन पर सवाल उठाए गए

सम्मेलन में मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजकिया ने पाकिस्तान के भीतर जल प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सिंधु क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और नदी के प्रवाह से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पानी का अधिकार एक मौलिक मानवाधिकार है और इस मुद्दे के बेहतर क्षेत्रीय प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।

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सिंधु जल संधि पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चर्चा

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के विचार लंबे समय से अलग-अलग रहे हैं। जहां भारत लगातार इस संधि की समीक्षा करने की जरूरत और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाता रहा है, वहीं पाकिस्तान पानी के अधिकारों और समझौते के पालन पर जोर देता है। अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हुई चर्चाओं के बाद यह मुद्दा एक बार फिर वैश्विक बहस का विषय बन गया है।

Location :  New Delhi

Published :  18 September 2026, 11:26 AM IST

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