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अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Img- Pinterest)
Washington: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार जिद्दी बनी महंगाई पर लगाम लगाने के लिए वहां के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने एक बेहद बड़ा और कठोर कदम उठाया है। व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कम ब्याज दरें रखने के लगातार बनाए जा रहे भारी दबाव को दरकिनार करते हुए फेड ने बुधवार को मुख्य बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है।
वर्ष 2023 के बाद से यह पहला मौका है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई इजाफा किया है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय बैंक राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय देश की आर्थिक स्थिरता और स्वायत्तता को ही सर्वोपरि मानता है।
फेडरल रिजर्व ने अपनी मुख्य ब्याज दर (बेंचमार्क रेट) में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में बेंचमार्क ब्याज दर बढ़कर लगभग 3.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख का सीधा असर आम जनता की दैनिक जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इसके बाद समय के साथ होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाला कर्ज काफी महंगा हो जाएगा। आम उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से कहीं अधिक ब्याज चुकाना पड़ेगा।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि आज उठाई गई यह नीतिगत कार्रवाई मुद्रास्फीति (महंगाई) को बैंक के 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से वापस लाने में काफी मददगार साबित होगी। इसके साथ ही अपनी त्रैमासिक रिपोर्ट जारी करते हुए फेड की दर-निर्धारण समिति (FOMC) ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर महंगाई पर तुरंत नियंत्रण नहीं मिला, तो इस साल के अंत तक ब्याज दरों को एक बार फिर बढ़ाकर 4.1 प्रतिशत के स्तर तक ले जाया जा सकता है। इससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में मौद्रिक नीति और अधिक सख्त हो सकती है।
फेडरल रिजर्व का यह कड़ा फैसला ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब अमेरिकी जनता पहले से ही रोजमर्रा की चीजों जैसे खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल और मकान के किरायों की आसमान छूती कीमतों से बुरी तरह जूझ रही है। अमेरिका में महज सात हफ्ते बाद बेहद महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और ऐसे में लगातार बढ़ती महंगाई चुनावी अभियानों का सबसे बड़ा और मुख्य मुद्दा बन चुकी है। अब ब्याज दरों के बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के लिए नया कर्ज लेना और पुराना कर्ज चुकाना दोनों ही बेहद महंगा और चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
इस पूरे घटनाक्रम को फेडरल रिजर्व के नए चेयरपर्सन केविन वॉश के रुख में आए एक बड़े और अप्रत्याशित मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नियुक्त किए गए केविन वॉश ने इसी साल मई में फेड अध्यक्ष का पद संभाला था और पद संभालने से पहले वे कई बार ब्याज दरें घटाने का समर्थन कर चुके थे।
हालांकि, पद पर बैठते ही और महंगाई के लगातार चिंताजनक आंकड़े सामने आने के बाद वॉश ने राजनीतिक पसंद को दरकिनार करते हुए केंद्रीय बैंक की नीतिगत स्वायत्तता और महंगाई पर लगाम लगाने को ही अपनी पहली प्राथमिकता बनाया।
अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने जनवरी 2026 से ही यूएस फेड रेट्स को पूरी तरह स्थिर रखा हुआ था, क्योंकि बैंक एनर्जी की कीमतों में अचानक आए उछाल के असर को समझना चाहता था। साथ ही बैंक यह भी देखना चाहता था कि आयातित सामानों पर लगे टैरिफ का असर पूरी अर्थव्यवस्था में किस तरह फैलता है।
हालांकि, हाल ही में हुई पिछली यूएस फेड मीटिंग के दौरान वोटिंग करने वाले कुल सदस्यों में से लगभग एक-चौथाई सदस्यों ने तुरंत यूएस फेड रेट बढ़ाने की मांग रखी थी, जो कि बाकी नौ वोटिंग सदस्यों की शुरुआती राय से अलग थी और आखिरकार दरों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हुआ।
Location : Washington
Published : 17 September 2026, 8:11 AM IST