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भारत समेत कई देशों पर 100% टैरिफलगा एंगे ट्रंप (Img: AI Generated Image)
New Delhi: अमेरिका में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर लाया गया एक अहम विधेयक अब प्रतिनिधि सभा में आगे बढ़ गया है। इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत भी उन देशों में शामिल हो सकता है, जिन पर इस प्रावधान का असर पड़ने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी भारत पर कोई नया 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं हुआ है।
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ ने मंगलवार शाम अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक अहम प्रक्रियात्मक बाधा पार की। प्रस्ताव के पक्ष में 214 वोट पड़े, जबकि 211 सांसदों ने इसका विरोध किया। दो डेमोक्रेट सांसदों ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ जाकर प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
यहां यह समझना जरूरी है कि 214-211 का मतदान प्रतिबंध विधेयक को अंतिम रूप से पास करने का वोट नहीं था। इस वोट ने सदन में बिल पर आगे की कार्रवाई और अंतिम मतदान का रास्ता साफ किया। अंतिम वोट बुधवार को होने की उम्मीद है।
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बिल में रूस से जुड़े ऊर्जा कारोबार पर कड़े कदमों का प्रस्ताव है। इसमें उन देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है, जो तय शर्तों के तहत रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ 100 फीसदी तक हो सकता है।
भारत और चीन रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों में रहे हैं। इसी वजह से इस बिल के पारित होने की स्थिति में दोनों देशों के व्यापार पर संभावित असर की चर्चा हो रही है। हालांकि, बिल के मौजूदा प्रावधानों के तहत किसी देश पर शुल्क अपने आप लागू नहीं होगा। राष्ट्रपति को तय परिस्थितियों और कानून में दी गई शर्तों के आधार पर कार्रवाई का अधिकार मिलेगा।
इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट अगस्त में 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर चुकी है। अब प्रतिनिधि सभा की मंजूरी इसके अगले महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। अगर सदन सीनेट से आए संशोधित पाठ को मंजूरी देता है, तो विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जा सकता है।
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बिल सिर्फ तेल खरीदने वाले देशों तक सीमित नहीं है। इसमें रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध कड़े करने के साथ उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव है, जिन्हें रूस के तेल कारोबार में प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाला ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूस का तेल कारोबार यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराता है। प्रस्ताव का मकसद रूस की ऊर्जा कमाई पर दबाव बढ़ाना है।
Location : New Delhi
Published : 16 September 2026, 1:59 PM IST