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प्रतीकात्मक तस्वीर (Img- Internet)
Lucknow: उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने उनके खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि वारंट को पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से जारी किया जाए।
यह मामला लखनऊ और बहराइच के स्कूलों में ड्रेस आपूर्ति से जुड़ा है। भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्था ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में ड्रेस सप्लाई के बाद भी करीब 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आर्थिक संकट की स्थिति का जिक्र किया।
आयोग ने 15 मार्च को लखनऊ और बहराइच के बीएसए को 16 अप्रैल को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा की पीठ के सामने शिकायतकर्ता पक्ष से अनूप यादव और संस्था के सीईओ अभिषेक पाठक मौजूद रहे।
हालांकि, बहराइच के बीएसए की अनुपस्थिति को लेकर बताया गया कि वे 18 अप्रैल तक अवकाश पर हैं, लेकिन लखनऊ के बीएसए बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित रहे।
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सुनवाई के दौरान बहराइच के खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि संबंधित स्कूलों की सूची और बकाया राशि उपलब्ध कराई जाए, तो वसूली प्रक्रिया में सहयोग किया जा सकता है।
इस पर आयोग ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह सात दिन के भीतर लखनऊ और बहराइच के स्कूलों की सूची और वसूली योग्य राशि प्रस्तुत करें।
आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं। बहराइच के जिलाधिकारी और लखनऊ के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया गया है कि अगली सुनवाई में दोनों जिलों के बीएसए की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।
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इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को निर्धारित की गई है। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
भुगतान न मिलने के कारण संस्था पिछले कई वर्षों से आर्थिक संकट का सामना कर रही है। बार-बार पत्राचार के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर उन्हें मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
Location : Lucknow
Published : 19 April 2026, 3:44 PM IST