‘पिता, पति और बेटे से आपकी पहचान नहीं…’ राहुल गांधी ने महिलाओं से क्यों कहा- ‘आजाद होना जरूरी है’?

पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और उनकी स्वतंत्र पहचान को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं सिर्फ बेटी, पत्नी या मां नहीं हैं, बल्कि उनका अपना अलग अस्तित्व है। राहुल ने पितृसत्तात्मक सोच, लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और पुरुषों के लिए अलग सामाजिक मानदंडों पर भी सवाल उठाए।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 22 August 2026, 9:15 PM IST
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Pune: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और उनकी पहचान को लेकर पुरुषवादी सोच पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि किसी महिला की पहचान सिर्फ बेटी, पत्नी या मां के तौर पर नहीं हो सकती। उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और उसे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। कार्यक्रम में राहुल ने छात्राओं और महिलाओं को मंच पर बुलाकर उनकी परेशानियां सुनीं और उनसे सीधे संवाद किया।

‘महिलाओं को तीन बॉक्स में बांटने की सोच गलत’

राहुल गांधी ने महिलाओं की पहचान को लेकर कहा कि समाज में अक्सर महिलाओं को तीन भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता है-बेटी, पत्नी और मां। उन्होंने कहा कि ये रिश्ते अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी महिला की पूरी पहचान सिर्फ इन्हीं रिश्तों से तय नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला का पिता, पति या बेटा हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान केवल इन रिश्तों से नहीं है। राहुल ने महिलाओं की स्वतंत्रता को जरूरी बताते हुए कहा कि देश की लड़कियों को आजाद होना चाहिए और उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

परिवार में अधिकार मांगने पर भी बदल जाता है नजरिया

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला से परिवार में संपत्ति और अधिकारों को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई पुरुष अपने परिवार में हिस्सा मांगता है तो उसे उसका अधिकार कहा जाता है, लेकिन महिला वही चीज मांगे तो उसे अक्सर हिस्सेदारी या विवाद के तौर पर देखा जाता है। महिला ने बताया कि परिवार की अपेक्षा रहती है कि वह सुबह से शाम तक नौकरी करे और घर लौटने के बाद घरेलू काम संभाले, खाना बनाए और बच्चों की देखभाल करे।

‘आखिर पुरुष महिलाओं को कंट्रोल क्यों करे?’

राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद महिलाओं से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि आखिर एक पुरुष को किसी महिला को नियंत्रित करने का अधिकार क्यों होना चाहिए? उन्होंने पितृसत्तात्मक सोच को लेकर भी सवाल किया। एक महिला ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब वह खुद को देखती है तो सबसे पहले खुद को एक इंसान मानती है। लेकिन समाज में उसे बार-बार महिला होने के आधार पर अलग नजर से देखा जाता है। उसने बताया कि कई बार लड़कियों को उनकी सुंदरता और शादी को लेकर ही आंका जाता है।

पढ़ाई और नौकरी को लेकर लड़कियों पर ज्यादा पाबंदी

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं की शिक्षा और रोजगार को लेकर भी कई आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जहां लड़के की पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़की की शिक्षा को लेकर अलग नजरिया रखा जाता है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए यह तय कर दिया जाता है कि उन्हें कब घर से बाहर जाना है, किसके साथ जाना है और कब वापस लौटना है। वहीं लड़कों को देर रात तक बाहर रहने और अपनी पसंद के फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है।

नेहा सिंह राठौड़ ने बताई सवाल पूछने की कीमत

कार्यक्रम में भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने भी राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि जब वह सरकार से सवाल पूछती हैं तो उन्हें जवाब मिलने के बजाय कई बार सवालों और एफआईआर का सामना करना पड़ता है। नेहा सिंह राठौड़ ने अपने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि शादी के बाद जब उन्होंने एक गीत गाया था, तब उनके घर पुलिस पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि ससुराल वालों से लेकर आसपास के लोगों तक ने उनके सवाल उठाने और गाने को लेकर आपत्ति जताई।

लड़कों की गलती सामान्य, लड़कियों पर ‘कल्चरल शॉक’

राहुल गांधी ने महिलाओं और पुरुषों के लिए समाज के अलग-अलग मानदंडों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक लड़का देर शाम या रात में घर से बाहर रह सकता है, लेकिन लड़की के लिए समय की पाबंदी लगा दी जाती है। उन्होंने कहा कि लड़का कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकता है, लेकिन लड़की के लिए एक समय के बाद यह कह दिया जाता है कि अब उसकी शादी की उम्र हो गई है और उसे पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

राहुल ने इसी अंतर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों की क्लिप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर लड़कों और लड़कियों दोनों की तरफ से गाली देने की बात सामने आई तो लड़कियों के गाली देने को ‘कल्चरल शॉक’ के तौर पर देखा गया। राहुल ने सवाल उठाया कि अगर लड़का गाली देता है तो उसे सामान्य माना जाता है, लेकिन लड़की वही करे तो उसके चरित्र और संस्कार पर सवाल क्यों उठते हैं?

‘महिलाओं की आजादी देश की ताकत है’

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं की आजादी को सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं बल्कि देश की प्रगति से जुड़ा सवाल बताया। उन्होंने कहा कि अगर आधी आबादी को उनकी क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा तो देश अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

Location :  Pune

Published :  22 August 2026, 9:15 PM IST

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