लोकसभा में नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव को बताया अपना दोस्त

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी और सपा सांसदों के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बीच दोस्ती और मुस्कान का दिलचस्प नजारा देखने को मिला।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 16 April 2026, 5:17 PM IST
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New Delhi: नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को उस वक्त माहौल अचानक गरमा गया, जब महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर चर्चा के बीच सियासी तंज, व्यक्तिगत टिप्पणियां और हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली। लोकसभा के भीतर बहस के दौरान शब्दों के वार ऐसे चले कि एक पल के लिए सदन का माहौल तनावपूर्ण नजर आया, लेकिन अगले ही पल उसी बहस में दोस्ती और मुस्कान की झलक भी दिखी।

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के बीच सियासी तकरार

केंद्र सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पेश किया। जिस पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को अपना “मित्र” बताया। पीएम का यह बयान सुनते ही विपक्षी बेंचों पर हलचल बढ़ गई और माहौल में हल्की गर्माहट आ गई।

धर्मेंद्र यादव का सीधा सवाल, पीएम का जवाब

बहस के दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव अपनी सीट से खड़े हुए और सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि “आप भी पिछड़ी जाति से आते हैं, लेकिन पिछड़ों का ध्यान नहीं रखते।” यह बयान आते ही सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबा बढ़ गया और सभी की नजरें प्रधानमंत्री के जवाब पर टिक गईं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि “धर्मेंद्र जी, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान पूरे देश के सामने रख दी। यह सच है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद भी कर देते हैं।”

अखिलेश यादव और डिंपल यादव की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद अखिलेश यादव मुस्कुराते नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी, जिससे सदन में मौजूद अन्य सांसद भी मुस्कुरा उठे। उनके पीछे बैठीं सपा सांसद डिंपल यादव भी इस पूरे घटना पर मुस्कुराती दिखाई दी। कुछ देर पहले तक जो माहौल तीखा था, वह अचानक हल्का और सहज हो गया।

सियासत में तंज और रिश्तों की झलक

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में जहां तीखे आरोप-प्रत्यारोप आम हैं, वहीं व्यक्तिगत रिश्तों और हल्के-फुल्के संवाद की भी जगह बनी रहती है। महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस के बीच इस तरह की बातचीत ने सदन के माहौल को कुछ पल के लिए सहज जरूर बना दिया।

Location :  New Delhi

Published :  16 April 2026, 5:17 PM IST

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