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संसद का विशेष सत्र
New Delhi: राजधानी में संसद का विशेष सत्र आज से शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई, जब केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 पेश किया। इस दौरान विपक्ष की ओर से K. C. Venugopal ने कई अहम सवाल उठाए, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। सरकार इस सत्र में तीन बड़े विधेयक लाने जा रही है, जिनका मकसद महिला आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है। यह सत्र न केवल विधायी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक टकराव और बहस के चलते आने वाले समय की दिशा तय करने वाला भी माना जा रहा है।
अमित शाह ने कहा कि जातीय जनगणना को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है कि सरकार इसके खिलाफ है। उन्होंने जनगणना प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि यह दो चरणों में होती है। साथ ही उन्होंने 850 सीटों के आंकड़े पर उठ रहे सवालों को भी खारिज किया और इसे गणितीय रूप से समझाने की बात कही।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी 129 से बढ़कर 195 सीटों तक पहुंच सकती है, इसलिए किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने के. सी. वेणुगोपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि सभी सवालों का विस्तृत जवाब अगले दिन दिया जाएगा और इसे स्पष्ट रूप से समझाया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की सीटों में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि बढ़ोतरी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल की लोकसभा सीटें बढ़ेंगी, जिससे उनका प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा और प्रतिशत में भी सुधार देखने को मिलेगा।
अमित शाह ने प्रियंका गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सभी सवालों पर विस्तृत जवाब अगली चर्चा में देंगे, लेकिन अभी स्पष्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह गलत नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि बिल से दक्षिण राज्यों की ताकत कम होगी और लोगों से इसे सही तरीके से समझने की अपील की।
प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी के काला टीका बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि 543 सीटों में सीधे 33% आरक्षण लागू क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि पद छोड़कर महिलाओं और ओबीसी को जगह दी जा सकती है। साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को अनावश्यक बताते हुए इसे टालने की बात कही।
प्रियंका गांधी ने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में चालाकी अपनी जगह है, लेकिन देशहित में सही फैसले जरूरी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया गया और सरकार इसे राजनीतिक तरीके से पेश कर रही है।
प्रियंका गांधी ने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार पहले से पूरी रणनीति बनाकर चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल का ड्राफ्ट देर से सार्वजनिक कर विपक्ष को दबाव में डाला गया और इसे महिला आरक्षण के नाम पर पेश कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा और ओबीसी वर्ग के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन के जरिए लोगों के अधिकार प्रभावित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। साथ ही संसद में सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव के नियम स्पष्ट न होने पर भी सवाल उठाए और इसे बिल की बड़ी कमी बताया।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार नई जनगणना से बच रही है क्योंकि इससे ओबीसी वर्ग के वास्तविक आंकड़े सामने आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग को उसका हक मिलना चाहिए, लेकिन सरकार जल्दबाजी में फैसले ले रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार आंकड़ों से घबरा क्यों रही है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल के मौजूदा प्रारूप में कुछ कमियां हैं। उन्होंने बताया कि 2029 तक लागू करने और सीटें बढ़ाने पर सहमति है, लेकिन 2011 की जनगणना को आधार बनाना और नई जनगणना का जिक्र न होना सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसमें राजनीति की संभावना भी जताई।
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाएं बार-बार बहकाने वालों को पहचानती हैं और सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने 2023 में भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया था और आज भी उसके पक्ष में मजबूती से खड़ी है, लेकिन सरकार के इरादों और तरीके पर सवाल उठाना जरूरी है।
प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक पर कहा कि ड्राफ्ट में ऊपर से कोई बड़ी समस्या नहीं दिखती, लेकिन असली मुद्दा परिसीमन और प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 2029 तक इसे लागू करने की बात है और सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है, लेकिन इससे प्रतिनिधित्व के संतुलन पर असर पड़ सकता है।
नरेंद्र मोदी से संसद के विशेष सत्र के दौरान वरिष्ठ मंत्रियों ने मुलाकात की। बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह और जे. पी. नड्डा शामिल रहे। इसके अलावा अश्विनी वैष्णव और जी. रेड्डी भी पहुंचे, जहां सत्र से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जाताई जा रही है।
जयराम रमेश ने कहा कि मुद्दा सिर्फ महिलाओं का नहीं, बल्कि संविधान का है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार व्यवस्था को अपने हिसाब से बदलना चाहती है। उनका कहना है कि इस विषय पर लोकसभा में सरकार को कड़ी चुनौती मिलेगी और आगामी वोटिंग में स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
जयराम रमेश ने कहा कि राज्यों और सांसदों की चिंताओं को तकनीकी बहानेबाजी बताकर खारिज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण और पूर्वोत्तर की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया। साथ ही ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण पर चुप्पी साधने और स्थानीय निकायों में आरक्षण की शुरुआत का श्रेय न देने पर भी सवाल उठाए।
जयराम रमेश ने पीएम मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर कुछ स्पष्ट नहीं कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया और सर्वदलीय बैठक की मांग भी नहीं मानी गई। साथ ही राज्यों से चर्चा न करने और प्रक्रिया स्पष्ट न करने पर भी सवाल उठाए।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण पर उन्हें कोई राजनीतिक श्रेय नहीं चाहिए। उन्होंने विपक्ष से कहा कि वे 'क्रेडिट का ब्लैंक चेक' देने को तैयार हैं, बस सभी दल साथ आएं। पीएम ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सहयोग से किसी का नुकसान नहीं होगा, बल्कि लोकतंत्र और देश को ही फायदा मिलेगा।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण किसी पर एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है जिसे दशकों तक रोका गया। उन्होंने कहा कि अब इसे टालने के लिए तकनीकी बहाने नहीं चलेंगे। पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन दशक तक इसे अटकाया गया, लेकिन अब देश की नारी शक्ति को और भ्रमित नहीं किया जा सकता।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा कि देश को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता। पीएम ने भरोसा दिलाया कि यह बदलाव संतुलन बनाए रखेगा और अगर जरूरत हो तो वे इसके लिए गारंटी और वादा दोनों देने को तैयार हैं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2023 में भी इसे जल्द लागू करने की मांग थी, लेकिन समय की कमी रही। अब 2029 को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेषज्ञों से चर्चा कर रास्ता निकाला है, ताकि महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि सभी दल इसे खुले मन से स्वीकार करें। पीएम ने कहा कि देश की नारी शक्ति सिर्फ फैसलों को ही नहीं, बल्कि नेताओं की नीयत को भी परखेगी और किसी भी तरह की खोट को माफ नहीं करेगी।
नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर राजनीति करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, जिसने इसका विरोध किया उसे नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने सभी दलों से साथ आने की अपील करते हुए कहा कि यह कदम किसी एक पार्टी नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के हित में है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि पंचायत स्तर पर आरक्षण के बाद अब महिलाएं बड़े स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जो पहले इसका विरोध करते थे, वे आज पीछे छूट गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम कर चुकी महिलाएं अब मुखर होकर नीति निर्माण में भागीदारी की मांग कर रही हैं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ सिर्फ सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं, बल्कि नीति निर्धारण में महिलाओं की बराबर भागीदारी से है। उन्होंने माना कि इस दिशा में देरी हुई है और सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर देशहित में फैसले लेने की सलाह दी।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह देश के लिए सौभाग्य की बात है कि आधी आबादी को नीति निर्माण में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने सभी सांसदों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की और कहा कि यह पहल देश की राजनीति और शासन व्यवस्था की दिशा और दशा तय करने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में परिसीमन बिल पर बोलते हुए कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ पल ऐतिहासिक होते हैं और यह वही समय है। उन्होंने कहा कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था। भारत को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' बताते हुए उन्होंने इसकी लंबी लोकतांत्रिक परंपरा पर जोर दिया।
अखिलेश यादव ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR और फॉर्म 7 के इस्तेमाल से उनकी मंशा उजागर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए वोट काटने की कोशिश हुई। चुनाव आयोग को शिकायत के बाद प्रक्रिया रुकी, लेकिन अब तक इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे लेकर कई गंभीर सवाल हैं। उन्होंने राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने पूछा कि भाजपा इस मुद्दे पर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा कि 21 राज्यों में उनकी सरकारों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा, विधायकों में उनकी संख्या 10% से कम है और लोकसभा में भी उनकी भागीदारी सवालों के घेरे में बनी हुई है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था और इसके प्रावधान 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि लोकसभा की सदस्य संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई होगा। मेघवाल ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी मौजूदा राजनीतिक ताकत बनी रहेगी।
कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि कानून मंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे पहली बार सदन में महिला आरक्षण पर बहस हो रही हो, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने भाषण में एक खास ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है।
गोगोई ने आगे कहा कि करीब तीन साल पहले गृह मंत्री ने भी इसी तरह की बातें कही थीं और आज के बयान से उनका 90 प्रतिशत मेल है। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे सरल बनाकर तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बोले- ‘राइट टू वोट राजनीतिक न्याय’ #LokSabha #ArjunRamMeghwal #Parliament #ParliamentSession @arjunrammeghwal @BJP4India pic.twitter.com/SpmjpY8fZO
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 16, 2026
संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा शुरू, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल बोले- यह ऐतिहासिक निर्णय का वक्त
Akhilesh Yadav क्यों बोले- जब प्रधानमंत्री को पिछड़ों से वोट चाहिये था...#Akhileshyadav #Samajwadiparty @Samajwadiparty @Dimpleyadav @yadavakhilesh #ParliamentSpecialSession pic.twitter.com/6v3XYhG2fg
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लोकसभा में पेश तीनों बिलों पर 17 अप्रैल शाम 4 बजे वोटिंग होगी, जबकि आज और कल इन पर चर्चा जारी रहेगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सुनने और जवाब देने के लिए तैयार है। चर्चा के लिए 12 घंटे का समय तय किया गया है।
बिलों को पुनर्स्थापित करने के लिए पहले ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश हुई, लेकिन विपक्ष की मांग पर मत विभाजन कराया गया। इसके बाद हुई वोटिंग में पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े, जिससे सरकार को स्पष्ट बढ़त मिल गई।
Dimple Yadav ने संसद में पूछा सवाल- जब 2023 में पास हुआ महिला आरक्षण बिल तो क्यों नहीं लागू किया उसी वक्त?@samajwadiparty @dimpleyadav #WomenReservation #Parliament #IndianPolitics #SP #LokSabha #BreakingNews #IndiaNews pic.twitter.com/IcmCR5Hcth
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सदन में बिल पेश करने के लिए पहले ध्वनि मत से पारित कराने की कोशिश हुई, लेकिन विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने वोटिंग की अनुमति दी, जिसमें पक्ष में 207 और विपक्ष में 126 वोट पड़े।
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डीएमके सांसद टी. आर. बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें सैंडविच बिल बताया और कहा कि ये आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए उनकी पार्टी विरोध कर रही है। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने टिप्पणी की कि काले या पीले झंडे दिखाने से सदन की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ता।
सपा सांसद अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना प्रक्रिया जारी है और सरकार जातीय जनगणना कराने का भी निर्णय ले चुकी है।
लोकसभा में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के पेश होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि संसद का दायित्व संविधान की रक्षा करना है, न कि उसकी मूल भावना को कमजोर करना। उन्होंने आरोप लगाया कि डिलिमिटेशन प्रक्रिया को जनगणना से अलग करना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।
अर्जुन राममेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश किया।
लोकसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल भावुक हो गया। शुरुआत में सांसदों ने महान गायिका आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
Location : New Delhi
Published : 16 April 2026, 11:29 AM IST