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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को भारत समेत पांच देशों के जहाजों के लिए खोल दिया है, जिससे भारत को बड़ी राहत मिली है। इस फैसले के बाद भारत में सियासत तेज हो गई है और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मोदी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Img: Internet)
Saharanpur: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक ऐसा फैसला आया है, जिसने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय हालात बल्कि भारत की घरेलू राजनीति को भी गरमा दिया है। जंग के माहौल में जहां समुद्री रास्ते बंद होने का खतरा मंडरा रहा था, वहीं ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को बड़ी राहत दे दी। लेकिन जैसे ही यह खबर आई, भारत में सियासी बयानबाजी शुरू हो गई और सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के 27वें दिन ईरान ने बड़ा फैसला लेते हुए होर्मुज स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोल दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऐलान किया कि भारत सहित कुछ मित्र देशों के जहाज इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजर सकते हैं। इस फैसले के बाद भारत सरकार ने ईरान का आभार जताया है, क्योंकि यह रास्ता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान ने साफ किया है कि भारत, इराक, रूस, पाकिस्तान और चीन के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। ईरान के महावाणिज्य दूतावास की ओर से भी यह जानकारी दी गई कि इन देशों के जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया गया है।
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वहीं दूसरी तरफ ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन देशों के जहाजों को अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जो अमेरिका और इजरायल के साथ इस जंग में शामिल हैं। अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि “हम युद्ध की स्थिति में हैं और दुश्मन या उनका साथ देने वाले देशों को इस रास्ते से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बाकी देशों के लिए मार्ग खुला रहेगा।
इस मुद्दे को लेकर भारत में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब ईरान खुद कह रहा है कि वह भारत के लिए रास्ता खोल रहा है, तो इसमें सरकार का क्या योगदान है। उनका कहना था कि अगर सरकार ने बेहतर फैसले लिए होते, तो सिर्फ 10-20 प्रतिशत नहीं बल्कि सभी भारतीय जहाज इस रास्ते से गुजर सकते थे।
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इमरान मसूद ने कहा कि ईरान भारत के साथ अपने रिश्तों की वजह से यह फैसला ले रहा है। ऐसे में सरकार को इसका श्रेय लेने की बजाय यह बताना चाहिए कि उसने इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए।