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चुनाव से पहले पांच राज्यों में हुई भारी जब्ती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की नकदी, ड्रग्स और फ्रीबीज आखिर किसके लिए लाई जा रही थीं? चुनाव आयोग की सख्ती के पीछे की पूरी कहानी और इन बरामदगियों का चुनावी असर क्या होगा, जानने के लिए पढ़ें यह खास रिपोर्ट।
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
New Delhi: चुनाव को निष्पक्ष और प्रलोभन मुक्त बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में बड़ी कार्रवाई की है। इस सख्ती के तहत अब तक 651.51 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी, शराब, ड्रग्स, कीमती धातुएं और फ्रीबीज जब्त किए जा चुके हैं। यह कार्रवाई चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर कड़ा प्रहार मानी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा बरामदगी पश्चिम बंगाल से हुई है। राज्यवार आंकड़े इस प्रकार हैं-
पश्चिम बंगाल: 319 करोड़ रुपये
तमिलनाडु: 170 करोड़ रुपये
असम: 97 करोड़ रुपये
केरल: 58 करोड़ रुपये
पुडुचेरी: 7 करोड़ रुपये
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को लुभाने और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं को रोकने के लिए बड़ी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में कुल ₹650 करोड़ की नकदी और शराब जब्त की गई #ElectionCommission #ECI #CashSeizure #ElectionNews @ECISVEEP pic.twitter.com/819cOHu21q
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 5, 2026
जब्त की गई सामग्री का कैटेगरी वाइज विवरण चौंकाने वाला है...
नकदी: 53.2 करोड़ रुपये
शराब: 29.63 लाख लीटर (कीमत 79.30 करोड़ रुपये)
ड्रग्स: 230 करोड़ रुपये
कीमती धातुएं: 58 करोड़ रुपये
फ्रीबीज और अन्य सामान: 231.01 करोड़ रुपये
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ड्रग्स की भारी मात्रा में बरामदगी है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर संकेत दे रही है।
पश्चिम बंगाल में 150 करोड़ रुपये के फ्रीबीज, 65 करोड़ रुपये के ड्रग्स, 55 करोड़ रुपये की शराब और 39 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं जब्त की गईं। वहीं तमिलनाडु में 30 करोड़ रुपये नकद, 67 करोड़ रुपये के ड्रग्स और 63 करोड़ रुपये के फ्रीबीज पकड़े गए।
असम में 56 करोड़ रुपये के ड्रग्स और 20 करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई। केरल में 41 करोड़ रुपये के ड्रग्स और 8 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं।
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चुनाव आयोग ने निगरानी के लिए 5,173 फ्लाइंग स्क्वॉड और 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें तैनात की हैं। ये टीमें शिकायत मिलने के 100 मिनट के भीतर कार्रवाई कर रही हैं। आयोग का कहना है कि यह कदम पैसे और लालच के जरिए वोटरों को प्रभावित करने की कोशिशों को रोकने के लिए उठाया गया है।