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क्या हमारे विचार और भावनाएं हमें बीमार बना सकती हैं? मेडिकल और साइकोलॉजी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबे समय तक बनी निगेटिव सोच शरीर में तनाव बढ़ाती है। जानिए चेतन-अवचेतन मन का खेल और पॉजिटिव सोच से सेहत सुधारने के उपाय।


मेडिकल और साइकोलॉजी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हमारे विचार और भावनाएं सीधे तौर पर हमारी सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। लंबे समय तक एक जैसे निगेटिव विचारों में फंसे रहना मानसिक तनाव बढ़ाता है, जो धीरे-धीरे शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकता है। इसलिए इमोशनल हेल्थ को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



डॉक्टरों के अनुसार हमारा मन दो हिस्सों में काम करता है। चेतन मन केवल 5 प्रतिशत सक्रिय रहता है, जबकि 95 प्रतिशत अवचेतन मन होता है। अवचेतन मन में जीवनभर की यादें और अनुभव रिकॉर्ड रहते हैं। यही कारण है कि पुराने अनुभव हमारे वर्तमान विचारों और व्यवहार को प्रभावित करते रहते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



पॉजिटिव विचार जैसे प्रेम, करुणा और शांति शरीर की हीलिंग प्रक्रिया को सपोर्ट करते हैं। वहीं ईर्ष्या, गुस्सा और असंतोष जैसे निगेटिव विचार लंबे समय तक बने रहें तो तनाव हार्मोन बढ़ाते हैं। डॉक्टर मानते हैं कि यही तनाव आगे चलकर हाई बीपी, एंग्जायटी और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



डॉक्टर बताते हैं कि दिमाग का लोअर ब्रेन भावनाओं पर तुरंत रिएक्ट करता है, जबकि प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सोच-समझकर निर्णय लेता है। चूंकि भावनात्मक हिस्सा पहले एक्टिव हो जाता है, हम तुरंत प्रतिक्रिया दे देते हैं। बाद में समझ आता है कि रिएक्शन गलत था, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



विशेषज्ञों के अनुसार ध्यान और मेडिटेशन विचारों को बदलने का सबसे प्रभावी तरीका है। जब हम अपने विचारों को सिर्फ देखने का अभ्यास करते हैं, तो अवचेतन मन के पुराने पैटर्न धीरे-धीरे बदलने लगते हैं। दिमाग कल्पना और सच्चाई में फर्क नहीं करता, इसलिए सकारात्मक सोच से व्यवहार और सेहत दोनों सुधर सकते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
