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जो कुत्ते अपने मालिक के पास बेड पर सोते हैं, उनकी उम्र 4–6 साल तक लंबी हो सकती है। पेट के बल सोने से ऑक्सिटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, तनाव कम होता है और सेलुलर एजिंग धीमी होती है। मालिक को भी मानसिक सुकून और बेहतर नींद मिलती है। पोषण पर भी ध्यान जरूरी।


पालतू कुत्तों को आज सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा माना जाता है। कई लोग अपने डॉग को बेड पर सुलाते हैं, जबकि कुछ इसे गलत आदत समझते हैं। लेकिन हालिया स्टडी और एक्सपर्ट एनालिसिस में एक हैरान करने वाला दावा सामने आया है। रिसर्च के मुताबिक, जो कुत्ते अपने मालिक के साथ बेड पर सोते हैं, उनकी उम्र 4 से 6 साल तक ज्यादा हो सकती है।



रिसर्चर्स का मानना है कि लंबे समय तक कम तनाव में रहने वाले कुत्तों में सेलुलर एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। जब कुत्ता मालिक के पास पेट के बल सोता है, तो यह उसकी सबसे सुरक्षित स्थिति मानी जाती है। इसका मतलब है कि वह खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहा होता है। इस दौरान कुत्ते के शरीर में ऑक्सिटोसिन हार्मोन रिलीज होता है।



ऑक्सिटोसिन को बॉन्डिंग हार्मोन कहा जाता है। यह तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करता है, कोशिकाओं में होने वाले तनाव को घटाता है और शरीर के रिपेयर व रिकवरी प्रोसेस को बेहतर बनाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही प्रक्रिया कुत्तों की सेलुलर एजिंग को धीमा करने में मदद करती है।



हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। कुछ कुत्ते रात में ज्यादा हिलते-डुलते हैं, जिससे मालिक की नींद खराब हो सकती है। हल्की नींद वालों के लिए यह आदत नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसलिए कुत्ते को बेड पर सुलाना मालिक और पालतू दोनों के स्वभाव पर निर्भर करता है।



रिसर्च में यह भी सामने आया कि कुत्तों की लंबी उम्र के लिए सिर्फ सुरक्षित माहौल काफी नहीं है। सही न्यूट्रिशन भी उतना ही जरूरी है। ज्यादातर कमर्शियल किबल ज्यादा तापमान पर पकाया जाता है, जिससे कई जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। न्यूट्रिशन की कमी से एजिंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कुत्तों में कम एनर्जी, बालों की चमक कम होना, जोड़ों में अकड़न और सांसों की बदबू जैसे लक्षण दिख सकते हैं।



कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि किबल के साथ ग्रीन्स सप्लीमेंट जोड़ने से पोषण की कमी पूरी की जा सकती है। गट हेल्थ के लिए स्पिरुलिना, सूजन और जोड़ों के लिए हल्दी और डिटॉक्स के लिए पार्सले फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी सप्लीमेंट को देने से पहले वेटरनरी एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है।
