एस्चेरिचिया कोली (E. coli) क्या है? CAG ने रेलवे स्टेशन के पीने के पानी में बैक्टीरिया को किया चिह्नित

CAG की रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। जांच में कई जगहों के वॉटर कूलर से लिए गए नमूनों में E. coli मिला। लेकिन मामला सिर्फ बैक्टीरिया मिलने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट ने पानी की जांच, क्लोरीन स्तर और तय मानकों के पालन में भी कमियां बताई हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 16 August 2026, 4:01 PM IST
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New Delhi: रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते समय पानी पीना यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में अगर उसी पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो जाएं तो चिंता होना स्वाभाविक है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की ऑडिट रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की जांच व्यवस्था में कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्टेशनों के वॉटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli बैक्टीरिया पाया गया।

8 स्टेशनों के पानी में मिला E. coli

ऑडिट के दौरान 49 रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी के नमूनों की जांच की गई। इनमें आठ स्टेशनों के वॉटर कूलर के पानी में E. coli पाया गया। इनमें सेंट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला शामिल हैं। इसके अलावा सदर्न रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, साउथ सेंट्रल रेलवे के हैदराबाद तथा ईस्टर्न रेलवे के मधुपुर स्टेशन का नाम भी सामने आया है।

यानी जिन जगहों पर यात्री भरोसे के साथ वॉटर कूलर का पानी पीते हैं, वहां पानी की गुणवत्ता की जांच और निगरानी पर अब सवाल उठ रहे हैं।

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सिर्फ E. coli ही नहीं, जांच व्यवस्था में भी कमी

CAG की रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू केवल बैक्टीरिया की मौजूदगी नहीं है। ऑडिट में यह भी सामने आया कि कई रेलवे स्टेशनों पर पानी की जांच तय समय और तय तरीके से नहीं की गई। पानी में मौजूद क्लोरीन की मात्रा, बैक्टीरियोलॉजिकल जांच और केमिकल टेस्टिंग से जुड़े नियमों के पालन में कमियां पाई गईं।

नियमों के मुताबिक पीने के पानी की जांच नियमित अंतराल पर होनी चाहिए। लेकिन ऑडिट में ऐसे स्टेशन भी मिले जहां जरूरी केमिकल जांच नहीं कराई गई। कुछ जगहों पर जांच तो हुई, लेकिन तय समय के हिसाब से उसकी बारंबारता नहीं रही।

E. coli क्या है?

E. coli यानी Escherichia coli बैक्टीरिया का एक बड़ा समूह है। इसके कई प्रकार इंसानों और जानवरों की आंतों में सामान्य रूप से पाए जाते हैं और नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन कुछ हानिकारक स्ट्रेन संक्रमण और पेट से जुड़ी गंभीर परेशानी पैदा कर सकते हैं। दूषित पानी या भोजन के जरिए शरीर में पहुंचने पर इसके कुछ प्रकार दस्त, पेट में तेज दर्द, उल्टी और अन्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए पीने के पानी में ऐसे बैक्टीरिया की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

CAG ने रेलवे से क्या कहा?

ऑडिट रिपोर्ट ने रेलवे को पानी की सप्लाई और टेस्टिंग व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है। CAG ने पीने के पानी की गुणवत्ता जांच से जुड़े तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सिफारिश की है। साथ ही यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल में बताए गए सभी जरूरी पैमानों पर व्यापक जांच करने पर जोर दिया गया है।

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रेल मंत्रालय ने सितंबर 2025 में ऑडिट के जवाब में बताया था कि जांच में सामने आई कमियों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। CAG ने हालांकि यह संकेत दिया कि अलग-अलग जगहों पर बार-बार असंतोषजनक नतीजे सामने आना बताता है कि मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

यात्रियों के लिए बड़ा सवाल

रेलवे देश में रोजाना करोड़ों यात्रियों की आवाजाही का माध्यम है। ऐसे में स्टेशन पर मिलने वाला पीने का पानी सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। CAG की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ पानी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, उसकी नियमित और सही तरीके से जांच भी उतनी ही जरूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  16 August 2026, 4:01 PM IST

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