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जगदीश मंदिर फोटो सोर्स- Google
New Delhi: राजस्थान के कोटा स्थित ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में सदियों पुरानी एक अनोखी धार्मिक परंपरा आज भी निभाई जा रही है। यहां हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान को 14 दिनों का विशेष ‘बीमारी अवकाश’ दिया जाता है।
200 किलो आम रस का विशेष भोग
मान्यता है कि तेज गर्मी में ठंडे जल से स्नान और आम रस का भोग ग्रहण करने के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके कारण मंदिर के पट दो सप्ताह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। परंपरा के तहत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान का 51 जल कलश और पंचामृत से विशेष अभिषेक किया जाता है। इसके बाद भगवान को करीब 200 किलो आम रस का विशेष भोग अर्पित किया जाता है।
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14 दिनों के दौरान मंदिर में विशेष सावधानियां
धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद रात 9 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि भगवान विश्राम कर सकें। इन 14 दिनों के दौरान मंदिर में विशेष सावधानियां भी बरती जाती हैं। भगवान के आराम में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए मंदिर की घंटियों और झालरों को कपड़ों से ढक दिया जाता है। वहीं, पुजारी हर दिन भगवान की प्रतीकात्मक सेवा करते हैं और स्वास्थ्य लाभ के लिए दूध व काली मिर्च का विशेष काढ़ा अर्पित किया जाता है।
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कैसे हुई मंदिर की स्थापना?
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, करीब 350 वर्ष पहले हाड़ौती क्षेत्र के श्रद्धालु सीमित यातायात सुविधाओं के कारण जगन्नाथ पुरी नहीं जा पाते थे। इसी कारण कोटा के रामपुरा क्षेत्र में भगवान जगदीश मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर में भगवान जगदीश बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
Location : New Delhi
Published : 27 May 2026, 9:50 PM IST