Rajiv Gandhi Jayanti: पायलट बनना चाहते थे राजीव गांधी, फिर एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी; ऐसे बने देश के सबसे युवा PM

राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे और इंडियन एयरलाइंस में पायलट थे। भाई संजय गांधी की मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। इंदिरा गांधी की हत्या के दिन प्रधानमंत्री बने। कंप्यूटर और शिक्षा क्षेत्र में बदलाव किए, लेकिन बोफोर्स और श्रीलंका नीति विवादों में घिरे। 1991 में उनकी हत्या हुई।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 August 2026, 12:03 PM IST
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New Delhi: राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। वह ऐसे राजनीतिक परिवार से आते थे, जहां उनके नाना जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री और मां इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। इसके बावजूद राजीव गांधी की राजनीति में आने की कोई खास इच्छा नहीं थी। उन्होंने इंडियन एयरलाइंस में पायलट के तौर पर करियर बनाया और निजी जीवन को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की।

संजय गांधी की मौत ने बदली राह

23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में उनके छोटे भाई संजय गांधी की मौत हो गई। संजय को इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था। भाई की मौत के बाद परिवार और कांग्रेस में राजीव पर राजनीति में आने का दबाव बढ़ा। आखिरकार उन्होंने 1981 में अमेठी से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

मां की हत्या के दिन संभाली PM की कुर्सी

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षा कर्मियों ने हत्या कर दी। उसी दिन महज 40 साल की उम्र में राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। देश गहरे सदमे में था और इसके बाद कई इलाकों में सिख विरोधी हिंसा भड़क उठी। ऐसे कठिन दौर में राजीव के सामने देश को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

कंप्यूटर और टेलीकॉम को दी नई दिशा

प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी ने भारत को तकनीक के दौर में आगे ले जाने पर जोर दिया। सरकारी कामकाज में कंप्यूटर के इस्तेमाल को बढ़ावा मिला और टेलीकॉम नेटवर्क के विस्तार पर काम हुआ। 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुआत भी उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में शामिल रही।

विवादों ने घेरा कार्यकाल

राजीव गांधी सरकार कई बड़े विवादों में भी घिरी। शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानून में बदलाव के फैसले को लेकर सरकार की आलोचना हुई। इसके बाद बोफोर्स सौदे में कथित रिश्वत के आरोपों ने उनकी 'मिस्टर क्लीन' छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 1989 के चुनाव में कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी।

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श्रीलंका का फैसला बना भारी

1987 में श्रीलंका में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय सेना की IPKF तैनात की गई। लेकिन भारतीय सैनिक लिट्टे के साथ संघर्ष में उलझ गए। इस अभियान में एक हजार से अधिक भारतीय सैनिकों की जान गई। यह फैसला राजीव गांधी की सबसे विवादित नीतियों में शामिल हो गया।

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46 साल की उम्र में हुई हत्या

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई। जांच में इस हमले का संबंध लिट्टे से सामने आया। उनकी उम्र उस समय सिर्फ 46 वर्ष थी। मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

आज भी हर 20 अगस्त को राजीव गांधी की जयंती पर उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर बहस होती है। एक तरफ उन्हें कंप्यूटर, टेलीकॉम और शिक्षा में बदलाव की दिशा देने वाले आधुनिक सोच के नेता के रूप में याद किया जाता है, तो दूसरी तरफ उनके विवादित फैसले भी चर्चा में रहते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  20 August 2026, 12:03 PM IST

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