K. Kamaraj: सत्ता मिली, लेकिन नहीं बदली जिंदगी! सादगी के उस नेता की कहानी, जिसने शिक्षा को बनाया सबसे बड़ा हथियार

साधारण परिवार में जन्मा एक लड़का कैसे आजादी की लड़ाई में उतरा और आगे चलकर तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा नाम बन गया? के. कामराज की कहानी सिर्फ संघर्ष और सत्ता की नहीं, बल्कि उस सोच की भी है जिसने गरीब बच्चों की शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 9 August 2026, 9:08 PM IST
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New Delhi: भारत की राजनीति में कई ऐसे नेता हुए, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए बड़े फैसले लिए, लेकिन कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनकी पहचान पद से ज्यादा उनके काम और सादगी से बनी। के. कामराज उन्हीं नेताओं में शामिल थे। साधारण परिवार से निकलकर देश की आजादी की लड़ाई में शामिल होने वाले कामराज ने आगे चलकर तमिलनाडु की राजनीति में ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है।

के. कामराज का जन्म 15 जुलाई 1903 को तमिलनाडु के विरुधुनगर में हुआ था। उनकी औपचारिक पढ़ाई ज्यादा नहीं हो सकी, लेकिन देश और समाज को समझने की उनकी क्षमता बेहद मजबूत थी। कम उम्र में ही वे महात्मा गांधी और आजादी के आंदोलन से प्रभावित हुए और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए।

अंग्रेजों ने कई बार भेजा जेल

कामराज ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ चल रहे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। विरोध प्रदर्शनों और स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कई साल जेल में बिताए, लेकिन जेल और अंग्रेजी शासन का दबाव उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सका। उनके लिए आजादी सिर्फ अंग्रेजों से मुक्ति का नाम नहीं थी। वे ऐसा भारत देखना चाहते थे, जहां आम लोगों और खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिले।

मुख्यमंत्री बने तो शिक्षा पर दिया सबसे ज्यादा जोर

भारत की आजादी के बाद कामराज ने राजनीति को आम लोगों की जिंदगी से जोड़ने पर जोर दिया। साल 1954 में वे मद्रास राज्य, जिसे आज तमिलनाडु कहा जाता है, के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के तौर पर उनके फैसलों में शिक्षा को खास जगह मिली। ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि गरीब और दूर-दराज के परिवारों के बच्चे भी पढ़ाई कर सकें। स्कूली बच्चों तक भोजन पहुंचाने के लिए भी कदम उठाए गए।

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कामराज का मानना था कि अगर किसी गरीब परिवार के बच्चे को शिक्षा मिल जाए, तो उसका पूरा भविष्य बदल सकता है। यही सोच उनके शासन की सबसे बड़ी पहचान बनी।

बड़े पद पर रहे, फिर भी जिंदगी रही बेहद साधारण

कामराज की सबसे खास बात उनकी सादगी थी। सत्ता के बड़े पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने आलीशान जीवनशैली नहीं अपनाई। वे आम लोगों के बीच रहना और उनकी समस्याओं को समझना पसंद करते थे। उनकी सार्वजनिक छवि ईमानदार और सादगी पसंद नेता की रही। कामराज मानते थे कि राजनीति का मतलब सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना है।

जब बड़े नेताओं से पद छोड़ने को कहा गया

राष्ट्रीय राजनीति में भी कामराज की भूमिका काफी अहम रही। साल 1963 में उन्होंने कांग्रेस के भीतर एक योजना सामने रखी, जिसे बाद में 'कामराज प्लान' के नाम से जाना गया। इस योजना के तहत वरिष्ठ नेताओं से सरकार के पद छोड़कर संगठन और जनता के बीच काम करने की बात कही गई। कामराज का मानना था कि नेताओं का जमीन से जुड़ा रहना जरूरी है।

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गुमनाम नहीं, प्रेरणा हैं कामराज

कामराज को भले ही आजादी की लड़ाई के सबसे चर्चित नेताओं में हमेशा शामिल नहीं किया जाता, लेकिन उनका योगदान कम नहीं था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, जेल गए और आजादी के बाद शिक्षा और सामाजिक विकास को प्राथमिकता दी। 2 अक्टूबर 1975 को उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी पहचान आज भी एक ऐसे नेता के रूप में बनी हुई है, जिसने सत्ता को सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी माना।

Location :  New Delhi

Published :  9 August 2026, 9:08 PM IST

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