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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स का उद्घाटन किया, जहां से वे अपना नया कार्यालय संचालित करेंगे। इस पहल से देश के पावर सेंटर में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा और प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज में नई शुरुआत, बेहतर समन्वय और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होगा सुनिश्चित होगा।
New Delhi: नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (13 Feb, 2026) को ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर का उद्घाटन किया। इसी के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब नए पते से संचालित होगा। दोपहर करीब 1:30 बजे प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के नाम का अनावरण किया।
‘सेवा तीर्थ’ परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय एक ही स्थान पर कार्य करेंगे। पहले ये संस्थान सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग इमारतों में स्थित थे। सरकार का कहना है कि इस समेकन से मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, तेज निर्णय प्रक्रिया और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। लंबे समय से बिखरे हुए सरकारी कार्यालयों के कारण समन्वय की कमी और बढ़ती रखरखाव लागत जैसी चुनौतियां सामने आती रही थीं, जिन्हें अब एकीकृत ढांचे के जरिए दूर करने का प्रयास किया गया है।
2014 के बाद से केंद्र सरकार ने कई नाम और ढांचे बदले हैं। साउथ ब्लॉक को ‘सेवा तीर्थ’, सेंट्रल सचिवालय को ‘कर्तव्य भवन’, राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’, रेस कोर्स रोड को ‘लोक कल्याण मार्ग’ और राज भवन, राज निवास को ‘लोक भवन (लोक निवास) का नाम दिया गया।
‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर का उद्घाटन
1910 से 1930 के बीच निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अपनी भव्यता, ऊंचे स्तंभों, गुंबदों और लाल-बफ सैंडस्टोन के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। यह वास्तुकला ब्रिटिश काल की शक्ति और वैभव को दर्शाती थी। इसके विपरीत, ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन आधुनिक, सादगीपूर्ण और कार्य-कुशल डिजाइन पर आधारित हैं। यहां भव्यता से अधिक पारदर्शिता, सहयोग और दक्षता पर जोर दिया गया है।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल तकनीकों से युक्त कार्यालय, केंद्रीकृत रिसेप्शन और जनता से सीधे संपर्क के लिए सार्वजनिक क्षेत्र बनाए गए हैं। इन भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। परिसर में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, सर्विलांस नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं।
नया प्रधानमंत्री कार्यालय ‘ओपन फ्लोर’ मॉडल पर आधारित है। पहले की तरह बंद कमरों और ऊंची दीवारों के बजाय अब खुले और आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र बनाए गए हैं। इससे अधिकारियों के बीच समन्वय और कार्य की गति बढ़ने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और उच्चस्तरीय बैठक कक्ष भी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किए गए हैं, जहां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठकें हो सकेंगी। ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक नया कार्यालय परिसर नहीं, बल्कि आधुनिक, तकनीक-संचालित और भारतीय पहचान से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।