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पायलट और एयर होस्टेस में कैंसर का बढ़ा खतरा (Img: AI Generated Image)
New Delhi: हवाई जहाज में सफर करने वाले यात्रियों को अक्सर विमान की ऊंचाई, बादलों और खूबसूरत नजारों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जो लोग रोज इसी आसमान में काम करते हैं, उनके लिए तस्वीर कुछ अलग हो सकती है।
दरअसल, 17 अगस्त को JAMA Internal Medicine में प्रकाशित स्टडी में पायलट और फ्लाइट क्रू के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने करीब 1.27 करोड़ डेथ सर्टिफिकेट और अमेरिका में 503 अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े आंकड़ों को देखा। रिसर्च में खास तौर पर रेडिएशन से जुड़े कैंसर से होने वाली मौतों पर ध्यान दिया गया। नतीजे सामने आए तो फ्लाइट अटेंडेंट और पायलट इस सूची में सबसे ऊपर नजर आए।
स्टडी के मुताबिक, 503 व्यवसायों की तुलना में रेडिएशन से जुड़े कैंसर के कारण मौतों के मामले में फ्लाइट अटेंडेंट पहले और पायलट दूसरे स्थान पर रहे। यह आंकड़ा इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि न्यूक्लियर टेक्नीशियन जैसे पेशे, जहां कृत्रिम रेडिएशन का एक्सपोजर हो सकता है, इस सूची में 12वें स्थान पर थे।
हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे यह साबित करने के तौर पर नहीं देखा जा सकता कि विमान में काम करने से ही कैंसर होता है। यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, इसलिए अलग-अलग जोखिमों के बीच कारण और परिणाम का सीधा संबंध तय नहीं किया जा सकता।
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रिसर्च में पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों में भी फर्क दिखाई दिया। महिला पायलटों में कैंसर से मृत्यु की दर 8.1%, जबकि पुरुष पायलटों में 6.1% रही। इसी तरह महिला फ्लाइट अटेंडेंट के लिए यह आंकड़ा 7.8% और पुरुष फ्लाइट अटेंडेंट के लिए 6.5% था। शोध में ब्रेस्ट कैंसर, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर, मल्टीपल मायलोमा, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थायरॉयड कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और त्वचा के कैंसर जैसे कई प्रकारों को देखा गया। फेफड़ों के कैंसर को विश्लेषण से बाहर रखा गया, ताकि धूम्रपान जैसे संभावित असर आंकड़ों को ज्यादा प्रभावित न करें।
इसका संबंध धरती के वायुमंडल और ऊंचाई से है। पृथ्वी की सतह पर मौजूद लोगों को वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष से आने वाले कॉस्मिक रेडिएशन से काफी हद तक बचाते हैं। लेकिन विमान जब हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता है तो इस प्राकृतिक सुरक्षा की मोटाई कम हो जाती है। नतीजतन, क्रू सदस्यों को जमीन पर रहने वाले लोगों की तुलना में कॉस्मिक आयोनाइजिंग रेडिएशन का ज्यादा सामना करना पड़ सकता है।
लंबी दूरी की उड़ानों और ध्रुवीय रास्तों पर यह एक्सपोजर खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही रात की शिफ्ट, लगातार बदलता टाइमटेबल और नींद का बिगड़ना भी क्रू की सेहत पर असर डालने वाले दूसरे कारक हो सकते हैं।
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यह खबर पढ़कर आम यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है। जो लोग साल में कभी-कभार विमान से सफर करते हैं, उनका एक्सपोजर उन लोगों से बिल्कुल अलग होता है जो अपने करियर के दौरान हजारों घंटे उड़ान में बिताते हैं। चिंता मुख्य रूप से लंबे समय तक विमान में काम करने वाले क्रू सदस्यों को लेकर है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में नियमित मेडिकल जांच, उड़ान घंटों की बेहतर निगरानी और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि एविएशन कर्मचारियों में कैंसर को लेकर पहले भी शोध हो चुके हैं। पुराने अध्ययनों में पायलट और एयर क्रू में कुछ खास कैंसर, खासकर मेलेनोमा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर के जोखिम पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, कॉस्मिक रेडिएशन को अकेले जिम्मेदार ठहराना अभी भी आसान नहीं है। यानी आसमान में उड़ना अपने आप में बीमारी की वजह नहीं माना जा सकता, लेकिन जो लोग वर्षों तक लगातार उड़ान भरते हैं, उनके लिए काम से जुड़े रेडिएशन और दूसरे जोखिमों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
Location : New Delhi
Published : 19 August 2026, 2:58 PM IST