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LPG कीमतों में उछाल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और होर्मुज जलसंधि की नाकेबंदी ने भारत की LPG आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। भारत की रसोई तक पहुंचने वाली गैस की सप्लाई पहले ही धीमी हो चुकी है और हालात जल्द सुधरते नहीं दिख रहे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह सामान्य होने में 3 से 4 साल तक का समय लग सकता है। युद्ध के कारण उत्पादन और लॉजिस्टिक्स दोनों प्रभावित हुए हैं, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संकट सिर्फ ट्रांसपोर्ट का नहीं, बल्कि उत्पादन से भी जुड़ा है। यह स्पष्ट नहीं है कि तेल और गैस के कुएं पूरी तरह बंद हो चुके हैं या सुरक्षा कारणों से उत्पादन रोका गया है। विदेशी सप्लायर्स के अनुसार, ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई में लंबा समय लग सकता है। खासकर सऊदी अरब और UAE के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने उत्पादन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जिससे वह वैश्विक संकटों के प्रति संवेदनशील बना रहता है। युद्ध से पहले करीब 90% सप्लाई होर्मुज जलसंधि के जरिए आती थी, लेकिन अब यह घटकर करीब 55% रह गई है। वैकल्पिक रास्ते खोजने की कोशिशें जारी हैं, फिर भी आपूर्ति में 40-50% तक की कमी बनी रहने की आशंका है।
देश में LPG की सालाना मांग लगभग 3.3 करोड़ टन है, लेकिन भंडारण क्षमता सीमित है। हाल ही में भारत के पास सिर्फ 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक बचा था, जो चिंता का विषय है। इसी कमी का असर कीमतों पर भी दिख रहा है। घरेलू सिलेंडर की कीमतों में ₹60 तक और कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे आम लोगों और कारोबारियों दोनों पर दबाव बढ़ा है।
भारत की LPG आपूर्ति मुख्य रूप से छह देशों पर निर्भर है। इनमें UAE और कतर सबसे बड़े सप्लायर हैं, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 41% और 22% है। इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। मौजूदा हालात में UAE पर हमलों का सीधा असर भारत की सप्लाई पर पड़ा है, जिससे जोखिम और बढ़ गया है।
संकट से निपटने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। नए देशों से आयात बढ़ाने और वैकल्पिक समुद्री मार्ग तलाशने की कोशिशें तेज की गई हैं। साथ ही, घरेलू रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं।
महंगी गैस का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों पर पड़ रहा है। उनकी लागत बढ़ने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
Location : New Delhi
Published : 16 April 2026, 7:58 AM IST