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इजरायल-ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत में LPG सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। IOCL ने दावा किया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी और लंबी लाइनों से उपभोक्ता परेशान हैं।
IOCL का बड़ा बयान (Img- Internet)
New Delhi: इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
भारत में भी इस संकट को लेकर आम लोगों में चिंता बढ़ी है। सोशल मीडिया पर एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिससे घबराहट का माहौल बन रहा है। हालांकि सरकार लगातार यह आश्वासन दे रही है कि देश में गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ने साफ कहा है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद देश में एलपीजी की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी के अनुसार, घरेलू सिलेंडरों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है और सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी है।
IOCL के मुताबिक, वर्तमान में देशभर में रोजाना करीब 28 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है। इसके अलावा 87 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही है, जिससे वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है।
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ईरान-इजरायल युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका असर एलपीजी के दामों पर भी पड़ा है। भारत में भी हाल के दिनों में गैस की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
सरकार ने हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही सिलेंडर बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। दिल्ली में अब घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये तक पहुंच गई है।
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है। 1 अप्रैल को ही इसमें करीब 200 रुपये का इजाफा किया गया, जिसके बाद इसकी कीमत 2000 रुपये के पार पहुंच गई है। इससे होटल और छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
IOCL ने बताया कि सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए 7,500 से ज्यादा जांच की गई हैं और 141 डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें से 5 को सस्पेंड भी किया गया है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए ऊर्जा सप्लाई को संतुलित रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही हैं।