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लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के दौरान हंगामे और आसन की अवमानना के मामले में स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लिया। कांग्रेस समेत विपक्ष के सात सांसदों को शेष बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है।
लोकसभा में टेबल पर चढ़े सांसद (Img- Internet)
New Delhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। इस दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा टेबल पर चढ़ने और आसन की ओर कागज फेंके जाने की घटनाओं ने संसदीय मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
सदन में बढ़ते हंगामे और आसन की अवमानना को गंभीरता से लेते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा रुख अपनाया। स्पीकर ने अनुशासनहीनता के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को संसद के शेष बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया। निलंबित सांसद अब मौजूदा सत्र की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे और वहीं कार्यवाही भी कल यानी बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
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निलंबित किए गए सांसदों में कांग्रेस के एस. वेंकटेशन, प्रशांत पाडोले, गुरजीत सिंह औजला, मणिक्कम टैगोर, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, डीन कुरियाकोस और किरण कुमार रेड्डी शामिल हैं। इन सांसदों पर सदन में कागज उछालने, टेबल पर चढ़ने और आसन की अवमानना करने का आरोप है। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि संसद की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Lok Sabha has passed a resolution suspending several members of the Opposition for “creating a ruckus” during the discussion in the Budget Session of Parliament.#KirenRijuju @KirenRijiju @LokSabhaSectt #BudgetForViksitBharat @mpa_india @ombirlakota pic.twitter.com/QGgTQT5Pub
— SansadTV (@sansad_tv) February 3, 2026
इस कार्रवाई से पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके भाषण को रोकने की कोशिश कर रही है। वेणुगोपाल ने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर सरकार में हिम्मत है तो विपक्ष के सांसदों को निलंबित करके दिखाए।
सांसदों के निलंबन के बाद संसद परिसर में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कार्रवाई करार दिया है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि यह फैसला संसदीय अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी था। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर सियासी घमासान तेज होने के आसार हैं।