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प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest )
New Delhi: देश की राजनीति में अब Gen-Z (18 से 29 वर्ष) सबसे अहम वोट बैंक के रूप में उभर रही है। हाल के छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया पर युवाओं की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब लगभग सभी प्रमुख दल युवाओं तक सीधे पहुंचने के लिए नए अभियान और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष फोकस करने का फैसला किया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित तीन वीडियो संदेश इंस्टाग्राम पर साझा किए थे। पार्टी का मानना है कि जहां युवा सबसे अधिक सक्रिय हैं, वहीं अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाई जानी चाहिए। साथ ही विपक्ष के आरोपों का जवाब भी सोशल मीडिया के जरिए दिया जाएगा।
समाजवादी पार्टी भी युवाओं को जोड़ने के लिए 'जेन-जेड संवाद' अभियान शुरू करने जा रही है। इसे पार्टी के 'विजन इंडिया' अभियान का विस्तार माना जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स और बेरोजगार युवाओं से सीधे संवाद स्थापित करना है।
कांग्रेस भी युवाओं के लिए विशेष अभियान की तैयारी में जुटी है। वहीं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पार्टी के उपाध्यक्ष आकाश आनंद को युवाओं के बीच संगठन को मजबूत करने और उनकी भागीदारी बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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राजनीतिक दलों ने युवाओं की ताकत को तब गंभीरता से महसूस किया जब जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा अपने मुद्दों को लेकर मुखर होकर सड़कों पर उतरे। इन आंदोलनों ने यह संकेत दिया कि युवा वर्ग अपने मुद्दों पर स्वतंत्र राय रखता है और उसका मतदान पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से अलग हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रणनीतिक तौर पर छात्र आंदोलनों को फैलने से रोकने का प्रयास किया। वहीं भाजपा ने विपक्षी दलों पर छात्रों को उकसाने के आरोप लगाए। दूसरी ओर विपक्षी दल लगातार युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए माना जा रहा है कि Gen-Z मतदाता इस बार राजनीतिक दलों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 30 July 2026, 10:04 AM IST
Topics : GEN Z India Politics Politics News