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अभिजीत दीपके (Img: Dynamite News)
New Delhi: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के गलत इस्तेमाल से जुड़ा एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। कथित डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीर को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया कंपनी मेटा को आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस गिरीश कठपालिया की पीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें देश के प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए उचित कदम उठाना जरूरी है।
मामला एक महिला की कथित मॉर्फ्ड तस्वीर से जुड़ा है। महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसकी निजी तस्वीर का इस्तेमाल बिना अनुमति किया गया।याचिका के अनुसार, AI फेस-स्वैपिंग टूल की मदद से महिला के चेहरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक आपत्तिजनक तस्वीर में मॉर्फ किया गया और फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया गया। महिला का आरोप है कि इस तस्वीर के वायरल होने के बाद उसे धमकियों का भी सामना करना पड़ा।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे ऐसे कंटेंट को नियंत्रित करने की जरूरत बताई। महिला की याचिका में कहा गया था कि कथित डीपफेक सामग्री उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है।
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े नेताओं सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह को भी नोटिस जारी किया है। महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इन लोगों ने कथित तौर पर मॉर्फ्ड तस्वीर को फैलाया। हालांकि, ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
महिला की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। याचिका में दावा किया गया है कि कथित डीपफेक तस्वीर को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। महिला ने अदालत से मांग की थी कि ऐसी तस्वीरों को सोशल मीडिया से हटाया जाए और उन्हें दोबारा प्रसारित होने से रोका जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश पुलिस को दिया है। कोर्ट ने पुलिस की संवेदनशीलता को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अगर पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है तो कोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि मामले को संवेदनशील तरीके से देखा जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट से जुड़े मामले भी सामने आ रहे हैं। AI फेस-स्वैपिंग तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे को दूसरी तस्वीर या वीडियो में बदला जा सकता है। ऐसे कंटेंट का गलत इस्तेमाल किसी व्यक्ति की छवि खराब करने, भ्रम फैलाने या निजी अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और AI आधारित कंटेंट की निगरानी से जुड़े कानूनी सवालों को भी सामने लाता है।
Location : New Delhi
Published : 25 September 2026, 7:41 PM IST