SUV को बना रखा था चलता-फिरता साइबर कॉल सेंटर, दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने SUV को मोबाइल कॉल सेंटर बनाकर साइबर ठगी करने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड समेत कई दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपियों पर 45 लाख रुपये के बीमा रिफंड का झांसा देकर 65 हजार रुपये ठगने का आरोप है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 31 October 2026, 6:11 PM IST
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New Delhi: साइबर ठगी करने वालों ने पुलिस से बचने के लिए नया तरीका अपनाया। आरोपियों ने किसी दफ्तर या एक निश्चित ठिकाने पर बैठकर लोगों को फोन करने की बजाय अपनी SUV को ही चलता-फिरता कॉल सेंटर बना लिया था। गाड़ी कभी किसी इलाके में खड़ी होती तो कभी किसी दूसरे स्थान पर पहुंच जाती, लेकिन लोगों को फोन कर ठगने का सिलसिला जारी रहता था। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही कथित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की SUV से सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, छह चेकबुक, तीन पासबुक और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें पांच PAN कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी कॉपी, हस्ताक्षर किया हुआ एक चेक और ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने भी शामिल हैं। पुलिस अब बरामद सामान और दस्तावेजों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया

45 लाख रुपये के रिफंड का झांसा देकर ठगे 65 हजार

इस मामले का खुलासा मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले नीलेश की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोपियों ने रिफंड की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर उनसे 65 हजार रुपये ले लिए।

यानी जिस रकम को वापस दिलाने का दावा किया गया, उसी रिफंड के नाम पर शिकायतकर्ता से पैसे ठग लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पूर्वी दिल्ली में FIR दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

बैंक खाते से मिला साइबर ठगी नेटवर्क का सुराग

जांच के दौरान पुलिस को हिमांशु राठौर से जुड़े एक बैंक खाते के बारे में जानकारी मिली। इस खाते में संदिग्ध लेनदेन की शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी दर्ज थीं। बैंक खाते की पड़ताल के दौरान पुलिस को नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में सुराग मिले।

पुलिस ने पहले हिमांशु राठौर को पकड़ा। इसके बाद तकनीकी जांच और इलाके में निगरानी के आधार पर बाकी संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 37 वर्षीय लोकेश तोमर, हिमांशु राठौर और 35 वर्षीय तुषार को गिरफ्तार किया गया है। तीनों दिल्ली के रहने वाले हैं।

SUV को बना रखा था मोबाइल कॉल सेंटर

पुलिस का कहना है कि आरोपी किसी एक निश्चित जगह पर बैठकर साइबर ठगी का काम नहीं करते थे। उन्होंने SUV को ही अपना मोबाइल कॉल सेंटर बना रखा था। गाड़ी में बैठकर लोगों को फोन किए जाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए लगातार लोकेशन बदली जाती थी।

जांच के बाद पुलिस ने पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में SUV को रोका। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कितने समय से इस तरीके से लोगों को निशाना बना रहे थे।

तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका

पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क में तीनों आरोपियों की भूमिका अलग-अलग थी। जांच में सामने आया है कि लोकेश तोमर कथित तौर पर पूरे नेटवर्क के कामकाज में तालमेल बैठाता था। उस पर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट यानी दूसरे लोगों के नाम पर इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते मैनेज करने का आरोप है। पुलिस मुंबई और तेलंगाना में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से भी उसके संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।

वहीं, तुषार पर संभावित शिकार लोगों से संपर्क करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वह खुद को किसी अधिकारी या कंपनी का एजेंट बताकर लोगों से बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, OTP और लॉगिन डिटेल हासिल करने की कोशिश करता था।

तीसरे आरोपी हिमांशु राठौर पर नेटवर्क को बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। इन खातों में कथित तौर पर ठगी की रकम मंगाई जाती थी और फिर कमीशन लेकर उसे दूसरे खातों में भेज दिया जाता था।

SUV से मिले कई अहम दस्तावेज

पुलिस ने SUV की तलाशी के दौरान सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, पांच PAN कार्ड और चार आधार कार्ड या उनकी कॉपी बरामद की। इसके अलावा छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक हस्ताक्षर किया हुआ चेक, दो किराये के एग्रीमेंट और 11 पासपोर्ट साइज फोटो भी मिले हैं।

बरामद सामान में ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने और NPCI की एक संदिग्ध फर्जी मुहर भी शामिल है। पुलिस को शक है कि कुछ बैंक खाते गलत पते की जानकारी देकर खुलवाए गए हो सकते हैं। इन खातों को बाद में नेटवर्क के दूसरे सदस्यों को सौंपे जाने की आशंका की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस मोबाइल फोन, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को ठगा और कितनी रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। इसके साथ ही मुंबई और तेलंगाना में सामने आए अन्य साइबर ठगी के मामलों से आरोपियों के संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  31 October 2026, 6:08 PM IST

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