New Air Chief Marshal: भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के सामने खड़ी ये 3 बड़ी चुनौतियां, आशुतोष दीक्षित कैसे निकालेंगे समाधान?

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के तौर पर कार्यभार संभाल लिया। उनके सामने फाइटर स्क्वाड्रन की कमी दूर करने, तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में तेजी लाने और 114 राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने जैसी चुनौतियां हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 31 October 2026, 6:49 PM IST
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New Delhi: भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर 2026 को नया प्रमुख मिल गया है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। नए वायुसेना प्रमुख के सामने कई अहम चुनौतियां हैं। इनमें लड़ाकू विमानों की घटती संख्या, स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की डिलीवरी में देरी और आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा बदलते सुरक्षा हालात और दो मोर्चों पर संभावित चुनौतियों के बीच वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।

फाइटर स्क्वाड्रन की कमी सबसे बड़ी चुनौती

भारतीय वायुसेना के सामने लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। वायुसेना की अधिकृत क्षमता 42.5 फाइटर स्क्वाड्रन की है, जबकि फिलहाल करीब 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। पुराने लड़ाकू विमानों की सेवानिवृत्ति और उनकी जगह नए विमानों को शामिल करने में देरी के कारण यह अंतर बना हुआ है।

खास तौर पर मिग-21 विमानों के बेड़े की विदाई के बाद लड़ाकू क्षमता को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भी कहा था कि स्क्वाड्रनों की संख्या में गिरावट रोकने और क्षमता बढ़ाने के लिए हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है।

ऐसे में एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि विमानों की खरीद और उत्पादन से जुड़ी योजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही मौजूदा संसाधनों के आधार पर वायुसेना की परिचालन तैयारियों को भी मजबूत बनाए रखना होगा।

तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में तेजी लाने की चुनौती

स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी नए वायुसेना प्रमुख के लिए तत्काल चिंता का विषय है। भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ करीब 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। इसके तहत 83 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद होनी है। इन विमानों की डिलीवरी 2024 से शुरू होनी प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण कार्यक्रम प्रभावित हुआ।

GE F404 इंजन की आपूर्ति, सॉफ्टवेयर वैलिडेशन और अन्य तकनीकी चुनौतियों के चलते विमानों की डिलीवरी में देरी हुई है। इसके अलावा 97 और तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद की भी योजना है।

दीक्षित के सामने HAL की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तय समयसीमा के अनुसार विमानों की आपूर्ति सुनिश्चित कराने का मुद्दा अहम रहेगा। तेजस की समय पर उपलब्धता वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम और स्क्वाड्रन क्षमता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

114 राफेल विमानों की खरीद पर भी नजर

वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद भी नए वायुसेना प्रमुख की प्राथमिकताओं में शामिल होगी। इस परियोजना के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने फरवरी 2026 में आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity) दे दी थी। हालांकि, अभी तक खरीद का अंतिम करार नहीं हुआ है।

इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कीमतों पर बातचीत, करार की शर्तें और उत्पादन से जुड़ी योजना अहम होंगी। खरीद प्रक्रिया में लगने वाला समय यह तय करेगा कि वायुसेना को नए लड़ाकू विमान कब तक उपलब्ध हो पाएंगे।

मिराज-2000 से तेजस तक उड़ाने का अनुभव

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। उन्हें मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, हॉक और तेजस जैसे विमानों को उड़ाने का अनुभव है। वह अब तक 3,500 घंटे से अधिक की उड़ान भर चुके हैं।

उनके अनुभव के साथ वायुसेना की कम होती स्क्वाड्रन क्षमता, स्वदेशी विमान कार्यक्रमों की समयसीमा और आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल की दिशा तय करेंगे। आने वाले समय में इन योजनाओं की प्रगति भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

Location :  New Delhi

Published :  31 October 2026, 6:49 PM IST

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