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वरिष्ठ दंत चिकित्सक एवं नोडल पदाधिकारी डॉ. शरद कुमार (Img: Dynamite News)
Deoghar: डॉक्टर का काम केवल बीमारी का इलाज करना नहीं होता, बल्कि लोगों के मन में भरोसा जगाना और उन्हें बेहतर जीवन की राह दिखाना भी होता है। झारखंड के देवघर में वरिष्ठ दंत चिकित्सक एवं नोडल पदाधिकारी डॉ. शरद इसी सोच के साथ वर्षों से स्वास्थ्य सेवा में जुटे हैं। अपनी सादगी, संवेदनशीलता और कार्यशैली के कारण उन्होंने मरीजों के साथ-साथ सहकर्मियों के बीच भी एक अलग पहचान बनाई है।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले डॉ. शरद ने अपनी कर्मभूमि देवघर को बनाया। लंबे समय से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े रहते हुए उन्होंने न सिर्फ हजारों मरीजों का इलाज किया, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी पूरी ईमानदारी से निभाया। यही वजह है कि आज उनका नाम जिले के भरोसेमंद चिकित्सकों में गिना जाता है।
डॉ. शरद का मानना है कि मरीज को दवा के साथ भरोसे की भी जरूरत होती है। यही सोच उनकी कार्यशैली में साफ दिखाई देती है। इलाज के दौरान वे मरीजों की बात धैर्य से सुनते हैं और उन्हें बीमारी के साथ-साथ बचाव के उपाय भी बताते हैं। उनके पास इलाज कराने वाले कई लोग बताते हैं कि उनका शांत स्वभाव और सरल व्यवहार मरीजों का आधा तनाव वहीं खत्म कर देता है। यही कारण है कि लोग उनके पास केवल उपचार के लिए नहीं, बल्कि विश्वास के साथ पहुंचते हैं।
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जब कोरोना महामारी के दौरान पूरा देश कठिन दौर से गुजर रहा था, तब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम लोगों तक समय पर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की थी। उस समय नोडल पदाधिकारी के रूप में डॉ. शरद ने अपनी टीम के साथ लगातार काम किया। स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर समन्वय, आवश्यक व्यवस्थाओं और लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनौतीपूर्ण हालात में भी उन्होंने अपने दायित्वों को प्राथमिकता दी और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का प्रयास किया।
दंत चिकित्सक होने के साथ-साथ डॉ. शरद को स्वास्थ्य विभाग में कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। उन्होंने हर पद पर अनुशासन, पारदर्शिता और टीमवर्क के साथ काम किया। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में उनके योगदान की सराहना समय-समय पर होती रही है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी उनकी कार्यशैली को प्रेरणादायक मानते हैं।
जनहित और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. शरद को कई बार सम्मानित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके कार्यों की सराहना की है। ये सम्मान उनके लिए उपलब्धि से ज्यादा जिम्मेदारी का एहसास हैं। उनका कहना है कि हर सम्मान उन्हें और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है।
डॉ. शरद का मानना है कि अच्छी सेहत किसी महंगी दवा से नहीं, बल्कि अच्छी आदतों से मिलती है। उनका कहना है कि नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, समय पर खाना और सकारात्मक सोच कई बीमारियों से बचाने में मदद करती है। वे लोगों को सलाह देते हैं कि रोजाना कुछ समय अपने शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूर निकालें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें भविष्य की बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।
आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी सलाह और दवाओं की भरमार है। इस पर डॉ. शरद लोगों को सावधान रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी बीमारी में सोशल मीडिया की जानकारी के आधार पर दवा लेना सही नहीं है। किसी भी उपचार से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर डॉ. शरद ने सभी चिकित्सकों और नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है और मरीज का विश्वास ही किसी भी चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी होता है। उन्होंने लोगों से अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, नियमित जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। साथ ही डॉक्टरों से भी मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भावना बनाए रखने का आग्रह किया।
डॉ. शरद का मानना है कि "डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसे का रिश्ता जितना मजबूत होगा, इलाज उतना ही प्रभावी होगा। स्वस्थ समाज का निर्माण केवल अस्पतालों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों और समर्पित चिकित्सकों के संयुक्त प्रयास से संभव है।"
Location : Deoghar
Published : 1 July 2026, 6:25 PM IST