Sawan 2026: नाग पंचमी पर नाग देव को दूध के अलावा क्या खिलाएं? जानें वो गुप्त भोग जिससे महादेव भी हो जाएंगे प्रसन्न

आज सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दुर्लभ महासंयोग में नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से कालसर्प दोष, भय और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। जानें शुभ मुहूर्त, सही पूजा विधि और नाग देवता को प्रसन्न करने के खास उपाय

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 17 August 2026, 10:12 AM IST
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New Delhi: आज 17 अगस्त को देशभर में नाग पंचमी का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस साल की नाग पंचमी बेहद खास और फलदायी मानी जा रही है, क्योंकि यह शुभ तिथि सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देव भगवान शिव के गले का आभूषण हैं।

ऐसे में महादेव और नाग देवता की एक ही दिन एक साथ पूजा करने से पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर कालसर्प दोष, सर्व-भय और जीवन की तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है, साथ ही घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

नाग पंचमी पर नाग देवता को कैसे रखें खुश

नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए प्रातःकाल स्नान ध्यान कर साफ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें। तांबे या मिट्टी के पात्र में नाग देवता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। नाग देव को रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, और देसी घी का दीपक जलाकर अर्पित करें।

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इस दिन नागों को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान न पहुंचाएं और ना ही मिट्टी की खुदाई करें। नाग देवता का ध्यान करते हुए "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ नागदेवतायै नमः" मंत्र का जाप करें। श्रद्धापूर्वक पूजा करने से नाग देव प्रसन्न होकर परिवार को भयमुक्त और समृद्ध बनाते हैं।

दूध के अलावा नाग देवता को क्या अर्पित करें

अक्सर लोग नाग पंचमी पर केवल दूध अर्पित करते हैं, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता को दूध के साथ-साथ अन्य सात्विक वस्तुएं चढ़ाना भी अत्यंत शुभ होता है। इस दिन नाग देव को भुना हुआ चना, गेहूं, लावा (धान का फोहा) और ताजे मौसमी फल अर्पित करने चाहिए।

इसके अलावा, गुड़, शुद्ध देसी घी, और तिल के लड्डू का भोग लगाना बेहद फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में नाग देवता को दूर्वा (दूब घास) और कमल या अन्य श्वेत पुष्प अर्पित करने से घर में मां लक्ष्मी का स्थिर वास होता है।

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शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि

सोमवार और पंचमी के इस संगम पर सुबह के समय भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करें। इसके बाद नाग देव की प्रतिमा पर दूध, जल और कुशा से अभिषेक करें। नाग पंचमी की कथा सुनें या पढ़ें और आरती उतारें।

पूजा संपन्न होने के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, तिल या वस्त्र का दान करें। इस शुभ दिन पर किए गए दान-पुण्य से कुंडली के राहू-केतु दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Location :  New Delhi

Published :  17 August 2026, 10:12 AM IST

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