श्रावणी मेला में स्वास्थ्य की अग्निपरीक्षा! चाईबासा से आए जवानों में मलेरिया के लक्षण, देवघर में शुरू हुई स्क्रीनिंग

देवघर में श्रावणी मेला 2026 के बीच स्वास्थ्य विभाग के सामने एक नई चुनौती सामने आई है। चाईबासा से मेला ड्यूटी के लिए पहुंचे कुछ जवानों में मलेरिया जैसे लक्षण मिलने के बाद उनकी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 8 August 2026, 4:56 PM IST
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Deoghar: बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में राजकीय श्रावणी मेला 2026 पूरे उत्साह और आस्था के साथ चल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने देवघर पहुंच रहे हैं। जिस तरह जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन मेले की व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क है, उसी तरह स्वास्थ्य विभाग भी श्रद्धालुओं और मेले में तैनात सुरक्षाकर्मियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार सक्रिय है।

जवानों में मिले मलेरिया के लक्षण

मेले में जगह-जगह स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था की गई है। एंबुलेंस को तैनात रखा गया है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए टोटो एंबुलेंस भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।लेकिन इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के सामने एक नई चुनौती सामने आई है। मेले की ड्यूटी के लिए चाईबासा से देवघर आए कुछ जवानों में मलेरिया जैसे लक्षण पाए गए हैं। यह जानकारी खुद देवघर के सिविल सर्जन ने दी है।

सिविल सर्जन के अनुसार चाईबासा से मेला ड्यूटी के लिए देवघर पहुंचे जवानों में कुछ जवानों में मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। फिलहाल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया चल रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में कितने जवान मलेरिया से संक्रमित हैं।

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चाईबासा की घटना ने पहले ही दी थी चेतावनी

दरअसल, चाईबासा और सारंडा क्षेत्र में मलेरिया को लेकर पहले भी गंभीर स्थिति सामने आती रही है। 2026 में पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया के हजारों मामले सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में 42,236 मलेरिया मामलों में पश्चिमी सिंहभूम में अकेले 16,553 मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि इन आंकड़ों का संबंध संबंधित रिपोर्ट की कटऑफ अवधि से है। यानी चाईबासा का इलाका मलेरिया के लिहाज से स्वास्थ्य विभाग के लिए पहले से ही संवेदनशील रहा है।

इसी साल सारंडा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात एक जवान की मलेरिया के कारण मौत की खबर भी सामने आई थी। जवान को तेज बुखार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।  इसी पृष्ठभूमि में जब चाईबासा से मेला ड्यूटी के लिए आए जवानों में मलेरिया जैसे लक्षण पाए गए हैं तो स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल उनकी जांच शुरू की है।

नए सिविल सर्जन के सामने बड़ी चुनौती

देवघर में नए सिविल सर्जन का पदस्थापन भी हाल ही में हुआ है। ऐसे समय में जब श्रावणी मेला अपने चरम पर है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंच रहे हैं, नए सिविल सर्जन के सामने स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालना निश्चित रूप से बड़ी चुनौती है।

टोटो एंबुलेंस बनी भीड़ के बीच बड़ी मदद

स्वास्थ्य विभाग ने इस बार टोटो एंबुलेंस को भी व्यवस्था में शामिल किया है। देवघर के मेला क्षेत्र में कई जगह ऐसी हैं जहां भारी भीड़ के कारण सामान्य एंबुलेंस को मरीज तक पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में टोटो एंबुलेंस का इस्तेमाल त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। भीड़ के बीच छोटी गाड़ी का आसानी से पहुंच पाना मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा और जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा सामान्य एंबुलेंस और स्वास्थ्य केंद्रों को भी मेला क्षेत्र में सक्रिय रखा गया है।

दवाओं से लेकर मेडिकल टीम तक

श्रावणी मेला को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाओं, मेडिकल उपकरणों और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की गई है। सदर अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए मेला अवधि में जरूरी चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया भी की गई है। क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं के इस धार्मिक आयोजन में स्वास्थ्य व्यवस्था का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। लंबी दूरी से पैदल चलकर आने वाले कांवरियों में थकान और कमजोरी से लेकर अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

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स्वास्थ्य विभाग ने कहा- लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं

सिविल सर्जन ने साफ तौर पर कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी तरह की कमी या लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। श्रावणी मेला में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मेले की ड्यूटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों और दूसरे कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। चाईबासा से आए जवानों में मलेरिया के लक्षण मिलने के बाद स्क्रीनिंग कराना इसी सतर्कता का हिस्सा माना जा रहा है।

अभी घबराने की जरूरत नहीं

फिलहाल देवघर में मलेरिया के किसी बड़े प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जवानों में पाए गए लक्षणों के आधार पर स्क्रीनिंग की जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता यह जरूर बताती है कि किसी भी संभावित बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

Location :  Deoghar

Published :  8 August 2026, 4:56 PM IST

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