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दिल्ली में 2023 के नारकोटिक्स ऑपरेशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जॉइंट सीपी की शिकायत पर IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप हैं कि उन्होंने बिना अनुमति छापेमारी की, एक विदेशी नागरिक को अवैध हिरासत में रखा और जब्त संपत्ति का गबन किया।
IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज (Img: Google)
New Delhi: दिल्ली पुलिस के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने 2023 में साउथ-वेस्ट दिल्ली में किए गए एक नारकोटिक्स ऑपरेशन से जुड़े गंभीर आरोपों में एक IPS अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR दिल्ली पुलिस के एक जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।
अधिकारी पर अपनी पोस्ट का गलत इस्तेमाल करने, बिना इजाजत के दिल्ली में रेड करने, एक विदेशी नागरिक को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और जब्त की गई प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
FIR में आरोपी IPS अधिकारी की पहचान शंकर चौधरी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उस समय वह मिजोरम में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (नारकोटिक्स) के पद पर तैनात थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शंकर चौधरी नवंबर 2023 में दिल्ली में छुट्टी पर थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने बिना किसी ऑफिशियल इजाजत के दिल्ली में एक नारकोटिक्स ऑपरेशन किया।
विजिलेंस डिपार्टमेंट की FIR के अनुसार, शंकर चौधरी ने 21 से 29 नवंबर, 2023 के बीच डाबरी-बिंदापुर इलाके में कई रेड कीं। न तो दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर को इसकी जानकारी दी गई और न ही कोई लिखित इजाजत ली गई। आरोप है कि 20 नवंबर को छुट्टी खत्म होने के बाद भी वह दिल्ली में एक्टिव रहे, जिसे सर्विस नियमों का साफ उल्लंघन माना जाता है।
जांच के दौरान मिले CCTV फुटेज में शंकर चौधरी 26 नवंबर, 2023 को सुबह 3:34 बजे दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ एक नाइजीरियाई नागरिक हैरिसन के घर में घुसते दिख रहे हैं। लगभग दो घंटे बाद, सुबह 5:40 बजे, उन्हें एक लॉकर और दो बैग के साथ बाहर निकलते देखा गया। FIR में कहा गया है कि इस दौरान कोई जब्ती मेमो, पंचनामा (गवाहों का बयान) या कानूनी दस्तावेज तैयार नहीं किए गए, जो क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का उल्लंघन है।
विजिलेंस जांच में यह भी पता चला कि हैरिसन को 26 से 29 नवंबर, 2023 तक वसंत विहार में मिजोरम हाउस में रखा गया था। इस दौरान न तो कोई गिरफ्तारी मेमो तैयार किया गया और न ही उसे कोर्ट में पेश किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 22(2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 341 और 342 का उल्लंघन है। CCTV फुटेज और कई पुलिस अधिकारियों के बयानों से इस गैर-कानूनी हिरासत की पुष्टि होती है।
FIR में 29 नवंबर को मिली एक PCR कॉल का भी जिक्र है, जिसमें शंकर चौधरी पर जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था। कॉल करने वाले की पहचान नहीं हो पाई, लेकिन उसी रात हैरिसन की रिहाई ने मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। विजिलेंस डिपार्टमेंट ने इस मामले में शामिल दिल्ली पुलिस के तीन कर्मियों के खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई की सिफारिश की है। आगे की जांच ACP रैंक के एक अधिकारी को सौंपी गई है।