वर्किंग वूमेन के अधिकारों पर दिल्ली हाईकोर्ट की मुहर: मैटरनिटी लीव के नाम पर कटौती पड़ी भारी, जानिए क्या हैं नए नियम

दिल्ली हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश से लौटने पर महिला कर्मचारी को वही पुराना पद, समान वेतन और प्रमोशन के पूरे अधिकार मिलेंगे। करियर से समझौता अब बर्दाश्त नहीं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 3 September 2026, 10:21 AM IST
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New Delhi: कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के बाद दफ्तर लौटना अक्सर कई चुनौतियों भरा होता है। कई बार उन्हें अपने पुराने पद से हाथ धोना पड़ता है या उनके प्रमोशन को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पुरानी परिपाटी पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि मां बनने के अधिकार और करियर की प्रगति दोनों साथ-साथ चलेंगे, किसी महिला को मातृत्व के आधार पर पीछे नहीं धकेला जा सकता।

पुराना पद या बिल्कुल समकक्ष जिम्मेदारी देना अब अनिवार्य

जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने एक पीड़ित महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि मातृत्व अवकाश से लौटने वाली महिला कर्मचारी को सामान्यतः उसी पद पर वापस लाया जाना चाहिए जिस पर वह छुट्टी पर जाने से पहले कार्यरत थी।

यदि किसी अनिवार्य संगठनात्मक कारण से वह विशिष्ट पद उपलब्ध न भी हो, तो भी कंपनी को उसे वेतन, ग्रेड, स्टेटस, मैनेजर के अधिकार और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों के मामले में पूरी तरह समान दर्जा देना ही होगा।

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मातृत्व सुरक्षा सिर्फ नौकरी और वेतन बचाने तक सीमित नहीं

अदालत ने इस भ्रांति को भी दूर किया कि मातृत्व सुरक्षा का मतलब केवल महिला की नौकरी और महीने की सैलरी बचाना भर है। जस्टिस सचिन दत्ता ने स्पष्ट किया कि मैटरनिटी लीव के बाद अधिकारों या ओहदे में किसी भी तरह की कमी करना सीधे तौर पर लैंगिक भेदभाव है। कानून महिला के केवल रोजगार की नहीं, बल्कि उसके करियर में निरंतर उन्नति (प्रमोशन) के अधिकारों की भी सुरक्षा करता है।

अकाउंटिंग मैनेजर को ट्रेजरी में भेजने पर अदालत का कड़ा रुख

यह मामला एक निजी कंपनी की महिला मैनेजर (अकाउंटिंग) से जुड़ा था, जो मातृत्व अवकाश पर गई थीं। जब वह वापस लौटीं तो उनकी अनुपस्थिति में उनका पद किसी अन्य कर्मचारी को सौंप दिया गया था और उन्हें ट्रेजरी विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया।

अदालत ने इसे महिला के करियर के साथ अन्याय माना और कंपनियों को चेतावनी दी कि छुट्टियों का बहाना बनाकर किसी भी महिला कर्मचारी के स्टेटस को कमतर नहीं आंका जा सकता।

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काम के घंटे और माहौल में लचीलेपन की मांग पर भी विचार करेगी कंपनी

अदालत ने महिलाओं के स्वास्थ्य और पारिवारिक प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए एक और अहम दिशा-निर्देश जारी किया। कोर्ट के अनुसार, मातृत्व के बाद महिला कर्मचारी अपनी शारीरिक स्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए काम के घंटे, काम करने के स्थान या कार्यशैली में बदलाव की मांग कर सकती है। नियोक्ताओं (Employers) का यह दायित्व होगा कि वे ऐसी हर मांग पर सहानुभूतिपूर्वक और सही तरीके से विचार करें।

Location :  New Delhi

Published :  3 September 2026, 10:21 AM IST

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