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47.7 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर (Source: X)
New Delhi: दिल्ली में विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत जारी मसौदा मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला शुरू हो गया है। शुरुआती दो दिनों में ही 5.34 लाख से अधिक दावे और आपत्तियां चुनाव आयोग के पास पहुंच चुकी हैं। आयोग के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 नवंबर 2026 को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
दिल्ली की करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली सूची में से लगभग 47.7 लाख लोगों के नाम मसौदा सूची से बाहर किए गए हैं। इन मतदाताओं को अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead) या डुप्लिकेट (Duplicate) यानी ASDDO श्रेणियों में रखा गया है।
बताया गया है कि इनमें 43 लाख से अधिक मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, यह अभी अंतिम सूची नहीं है। संबंधित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 19 से 33 लाख ऐसे रिकॉर्ड भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें माता-पिता की उम्र बच्चों से कम होना या परिवार के सदस्यों के बीच दर्ज संबंधों में अंतर जैसी गड़बड़ियां शामिल हैं।
चुनाव आयोग ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को अलग से नोटिस जारी करेगा। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है या जो नया नाम जुड़वाना चाहते हैं, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ Form 6 भरकर दावा पेश कर सकते हैं।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने वाले लोगों के पास 12 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद उनका निपटारा किया जाएगा। इसके बाद 4 नवंबर को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
मतदाता अपना नाम चुनाव आयोग के National Voter Service Portal (NVSP) या दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर EPIC नंबर अथवा व्यक्तिगत जानकारी के जरिए चेक कर सकते हैं।
SIR के तहत पंजाब की मसौदा मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी बाहर किए जाने की जानकारी सामने आई है। ड्राफ्ट सूची में उनके नाम के सामने 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' दर्ज किया गया है और उन्हें ASDDO श्रेणी में रखा गया है।
राघव चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए आरोप लगाया है कि प्रक्रिया में पंजाब सरकार के कर्मचारियों की भूमिका है। वहीं आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और इसमें राज्य सरकार की भूमिका नहीं है।
चूंकि यह मसौदा सूची है, इसलिए संबंधित व्यक्ति दावा और आपत्ति के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 3 September 2026, 9:30 AM IST