BCI की कुर्सी पर सुप्रीम कोर्ट का वार! मनन मिश्रा की पावर सीमित, अब नहीं ले पाएंगे बड़े फैसले

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की भूमिका और लंबे कार्यकाल को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मिश्रा लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए स्थायी अध्यक्ष नहीं हैं।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 2 September 2026, 6:29 PM IST
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New Delhi: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मौजूदा BCI पदाधिकारी रोजमर्रा के नियमित और प्रशासनिक काम जारी रख सकते हैं। हालांकि, बड़े नीतिगत फैसले लेने की शक्ति उन पर नहीं होगी।

ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी और सहमति जरूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश BCI के कामकाज और उसके मौजूदा नेतृत्व को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया है।

कोर्ट ने कहा- मनन मिश्रा स्थायी अध्यक्ष नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मनन कुमार मिश्रा फिलहाल स्थायी रूप से चुने गए अध्यक्ष नहीं हैं। उनकी स्थिति प्रो-टेम यानी अस्थायी या कार्यवाहक अध्यक्ष जैसी है। कोर्ट के मुताबिक, उनका अधिकार नई राज्य बार काउंसिलों के चुनाव और उसके बाद नई BCI के गठन तक सीमित रहेगा। इस अवधि में मौजूदा पदाधिकारी BCI के सामान्य कामकाज को संभालेंगे, लेकिन बड़े नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे।

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याचिका में लंबे कार्यकाल पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाया गया। याचिका में दावा किया गया कि मिश्रा वर्ष 2012 से लगातार BCI के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने BCI के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। इसके बावजूद अप्रैल 2025 में जारी अधिसूचना में उनका कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए नए चुनाव कराने की मांग की है।

पर्ल फर्स्ट' ट्रस्ट को लेकर भी सवाल

याचिकाकर्ताओं ने BCI से जुड़े ‘पर्ल फर्स्ट’ ट्रस्ट को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मनन कुमार मिश्रा समेत कुछ लोग इस ट्रस्ट में व्यक्तिगत क्षमता में लाइफ मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। यह ट्रस्ट गोवा में अंतरराष्ट्रीय कानूनी शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ा विश्वविद्यालय संचालित करता है। याचिकाकर्ताओं ने BCI के पद और ट्रस्ट से जुड़े हितों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति न्यायालय के आगे के आदेशों से स्पष्ट होगी।

नई BCI के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी

सुप्रीम कोर्ट ने नई BCI के गठन को लेकर भी प्रक्रिया तय की है। कोर्ट ने सभी राज्य बार काउंसिलों के चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से दो सप्ताह के भीतर दो महिला सदस्यों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। इसके बाद नई राज्य बार काउंसिलें अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI प्रतिनिधि का चुनाव करेंगी। इन चुनावों के बाद ही नई BCI के गठन को लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

मनन मिश्रा के कार्यकाल और BCI के कामकाज से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है। तब तक BCI के मौजूदा पदाधिकारियों की शक्तियां कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सीमित रहेंगी।

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NALSAR विवाद के बाद फिर चर्चा में आए थे मिश्रा

मनन कुमार मिश्रा हाल में NALSAR से जुड़े एक विवाद को लेकर भी सुर्खियों में आए थे। BCI ने 2026 बैच के कुछ छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। मामला दीक्षांत समारोह में सीजेआई की मौजूदगी को लेकर छात्रों के एक वर्ग की आपत्ति से जुड़ा था।

बाद में BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया और मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी। इसके बाद उनके इस्तीफे की मांग उठी और उनके लंबे कार्यकाल को लेकर सवाल तेज हो गए। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

Location :  New Delhi

Published :  2 September 2026, 6:19 PM IST

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