कैश कांड: यशवंत जस्टिस वर्मा के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई, तीन आरोप तय होने के बाद क्या होगा आगे

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में तीन सदस्यीय जांच समिति द्वारा तीनों आरोप सही पाए जाने के बाद मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 12 August 2026, 6:15 PM IST
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New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में अब मामला और गंभीर हो गया है। उनके खिलाफ जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति ने तीनों आरोपों को सही माना है। समिति ने आगे कार्रवाई की सिफारिश भी की है। अब उनके खिलाफ संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा सकती है।

इस्तीफे के बावजूद कार्रवाई क्यों हो रही है?

जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था (जो अप्रैल 2025 से प्रभावी होना था)। इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में बना हुआ है। इससे उनके मामले पर लागू होने वाली कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के 1978 के फैसले के अनुसार, किसी जज के पद छोड़ने के लिए केवल इस्तीफा सौंपना ही काफी माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अब उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?

शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव की संभावना

सरकारी सूत्रों का कहना है कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। हालांकि, प्रस्ताव की प्रक्रिया संसदीय नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच और कमेटी का यह निष्कर्ष कि आरोप सही थे उनके इस्तीफा सौंपने के बाद हुई थी।

जस्टिस वर्मा पर लगे कौन से आरोप सही पाए गए?

पहला आरोप: दिल्ली में 30 तुगलक क्रिसेंट स्थित उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों के बड़े ढेर मिले थे। कमेटी के अनुसार, जस्टिस वर्मा कैश के स्रोत के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए और न ही इसके मालिक की पहचान कर पाए।

दूसरा आरोप: कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि मामले से जुड़े सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखा गया था। स्टोररूम की स्थिति में बदलाव या कुछ नोटों के गायब होने के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। हालांकि, कमेटी ने यह नहीं कहा कि जस्टिस वर्मा ने खुद नोट हटाए थे।

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तीसरा आरोप: समिति ने जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जवाब में मामले को लेकर जरूरी स्पष्टता नहीं थी।

अब जस्टिस वर्मा के पास क्या विकल्प?

महाभियोग प्रस्ताव पर संसद में चर्चा के दौरान जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका मिल सकता है। अब आगे की नजर संसद की कार्रवाई और इस मामले में होने वाले कानूनी फैसलों पर रहेगी। इस्तीफे के बावजूद जांच और संभावित महाभियोग की प्रक्रिया के कारण यह मामला न्यायपालिका से जुड़े मामलों में बेहद असाधारण माना जा रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  12 August 2026, 6:13 PM IST

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