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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग डॉक्टर से 48 लाख की ठगी (Img: Dynamite News)
Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ कानपुर साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने स्वरूपनगर निवासी बुजुर्ग चिकित्सक योगेश चंद्र मिश्रा को कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देकर करीब 48 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की। गिरोह का कथित सरगना मुकुल चौबे अभी फरार है।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले मोबाइल फोन पर पीड़ित से संपर्क करते थे और खुद को किसी बड़े अधिकारी के रूप में पेश करते थे। इसके बाद कॉल किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी जाती थी। दूसरा आरोपी खुद को ईडी या सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को गंभीर कानूनी मामले में फंसाने की धमकी देता था। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, योगेश चंद्र मिश्रा को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया। उन्हें फोन कर बताया गया कि उनके आधार से जुड़ा एक मोबाइल नंबर कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद अलग-अलग लोगों से उनकी बात कराई गई। इन लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए गंभीर अपराध में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी।
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कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपियों ने चिकित्सक से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 48 लाख 20 हजार रुपये जमा करा लिए। बैंक पहुंचने के बाद उन्हें ठगी का पता चला, जिसके बाद साइबर थाने में शिकायत की गई। पुलिस अब रकम के ट्रांजेक्शन की पूरी कड़ी खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन खातों में पहुंचा और वहां से कहां भेजा गया।
एडीसीपी अरीबा नोमान के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पहचान संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर कर अपना पता प्रतापगढ़ का दर्शाया। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम से कंपनी तैयार की गई। पुलिस के अनुसार कंपनी के बैंक खाते में 15 बार में करीब 25.98 लाख रुपये पहुंचे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के खाते में आने वाली रकम को तेजी से दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस को करीब 611 बैंक खातों तक रकम पहुंचने की जानकारी मिली है। ये खाते अलग-अलग राज्यों में बताए जा रहे हैं। इससे पुलिस को साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पुलिस को बैंक खातों से जुड़ी जानकारी, कंपनी के दस्तावेज, संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप चैट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। पुलिस इन डिजिटल सुरागों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, एनसीआरपी पर बैंक खातों की पड़ताल के दौरान अलग-अलग राज्यों से जुड़ी चार साइबर अपराध शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों को जोड़ने पर करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली है। फरार आरोपी मुकुल चौबे की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं और पूरे आर्थिक नेटवर्क की जांच की जा रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि फोन पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए और पैसे की मांग करे तो उसके झांसे में न आएं। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
Location : Kanpur
Published : 30 September 2026, 7:03 PM IST