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पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने डीएम-एसपी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए इसे अदालत को चुनौती जैसा बताया। कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई और वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट (Image Source: Google)
New Delhi: पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई हिंसा और बदसलूकी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए कई तीखे सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर जिला प्रशासन की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर मालदा के डीएम और पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर क्यों नहीं पहुंचे।
चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि इस तरह का रवैया अदालत को चुनौती देने जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने इस घटना को न सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता, बल्कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश भी बताया।
दरअसल, ये मामला उस समय का है जब चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को मालदा में भीड़ ने घेर लिया और करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अधिकारियों को बिना सुरक्षा, भोजन और पानी के घंटों तक रखा गया, जबकि प्रशासन को पहले से जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने इसे न्याय प्रशासन में बाधा डालने की सुनियोजित और दुस्साहसी कोशिश करार दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के रवैये पर भी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जो बेहद चिंताजनक है।
अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। साथ ही अगली सुनवाई में सभी संबंधित अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है और उनसे विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए। इसके अलावा सभी संवेदनशील स्थलों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, आम लोगों की आवाजाही सीमित करने और अधिकारियों व उनके परिवारों की सुरक्षा का तत्काल आकलन करने का आदेश दिया गया है।