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हिडन डिहाइड्रेशन (Img- Canva)
New Delhi: बढ़ते तापमान और उमस के इस दौर में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) एक सामान्य समस्या लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चिकित्सा विज्ञान अब इसे एक 'साइलेंट किलर' के रूप में देख रहा है? अक्सर लोग सोचते हैं कि जब प्यास लगेगी, तब पानी पी लेंगे।
जब आपको प्यास का अहसास होता है, तब तक आपका शरीर वास्तव में 2% पानी खो चुका होता है और आपके आंतरिक अंग 'स्ट्रेस' (तनाव) में आ चुके होते हैं। इस स्थिति को 'हिडन डिहाइड्रेशन' कहते हैं, जिसका सीधा असर आपके मस्तिष्क, हृदय और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। आइए जानते हैं उन गुप्त संकेतों को जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
जब शरीर में पानी का स्तर गिरता है, तो मस्तिष्क के टिश्यूज (ऊतक) अपनी नमी खोने लगते हैं, जिससे वे सिकुड़ते हैं और खोपड़ी पर दबाव बनता है। यही कारण है कि डिहाइड्रेशन होने पर तेज सिरदर्द होने लगता है। इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के बीच सुरक्षा कवच का काम करने वाला फ्लूइड कम होने से चक्कर आने लगते हैं और इंसान चाहकर भी किसी काम पर फोकस नहीं कर पाता, जिसे मेडिकल भाषा में 'ब्रेन फॉग' कहा जाता है।
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यह डिहाइड्रेशन का सबसे खतरनाक और अनदेखा एंगल है। पानी की कमी होने पर शरीर में रक्त की कुल मात्रा (Blood Volume) घट जाती है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है। अब गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए आपके दिल को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। नतीजा? बिना किसी शारीरिक श्रम के भी अचानक दिल की धड़कन (Heart Rate) तेज हो जाती है, जो दिल के मरीजों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकता है।
शरीर का अपना एक कूलिंग सिस्टम होता है, जो पसीने के जरिए तापमान को नियंत्रित करता है। लेकिन जब पानी की गंभीर कमी होती है, तो शरीर पानी बचाने के लिए पसीना बनाना बंद कर देता है। बेहद गर्मी में भी अगर पसीना कम आ रहा है, तो समझ लें कि शरीर का 'नेचुरल एसी' फेल हो चुका है। इसके साथ ही होंठ फटने लगते हैं, मुंह में लार बनना बंद हो जाती है और त्वचा पूरी तरह बेजान व रूखी दिखने लगती है।
किडनी हमारे शरीर का फिल्टर है, जिसे चलाने के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सामान्य स्थिति में यूरिन का रंग हल्का पीला होता है, लेकिन जब शरीर में पानी की गंभीर किल्लत होती है, तो किडनी यूरिन को गाढ़ा कर देती है, जिससे उसका रंग गहरा पीला या नारंगी हो जाता है। टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) शरीर से बाहर न निकल पाने के कारण इंसान बिना कुछ किए ही भयंकर कमजोरी और थकान महसूस करने लगता है।
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हिडन डिहाइड्रेशन से बचने के लिए केवल सादा पानी पीना काफी नहीं है, क्योंकि पसीने के साथ शरीर के जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी निकल जाते हैं। इसलिए पानी में नींबू, काला नमक या ओआरएस (ORS) मिलाकर पिएं। तरबूज, खीरा और छाछ जैसे हाइड्रेटिंग फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें। चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाएं, क्योंकि ये शरीर से पानी को सुखाने का काम करते हैं।
Location : New Delhi
Published : 17 June 2026, 1:52 PM IST