Sibling Therapy: लड़ाई-झगड़े और बातचीत बंद? भाई-बहनों के बीच की कड़वाहट चुटकियों में दूर कर रही है ये खास थैरेपी

बचपन की खट्टी-मीठी नोकझोंक और बड़े होने पर बढ़ती दूरियां हर घर की कहानी बन गई हैं। गलतफहमियों और पुराने विवादों से टूटे भाई-बहनों के रिश्तों में फिर से प्यार, भरोसा और मिठास घोलने में 'सिबलिंग थैरेपी' एक अचूक और असरदार उपाय साबित हो रही है। जानिए यह कैसे काम करती है।

Updated : 29 July 2026, 3:22 PM IST
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New Delhi: बचपन में खिलौनों के लिए झगड़ना, मम्मी से एक-दूसरे की शिकायत करना और फिर कुछ ही देर में दोस्त बन जाना- भाई-बहनों का रिश्ता दुनिया के सबसे प्यारे और लंबे रिश्तों में गिना जाता है। बड़े होने पर यही भाई-बहन एक-दूसरे का सबसे बड़ा सहारा और परिवार की जिम्मेदारी बांटने वाले बनते हैं। लेकिन हर बार यह रिश्ता सीधा और आसान नहीं रहता।

कई बार वक्त के साथ गलतफहमियां, बचपन की पुरानी बातें, आपस में तुलना या घर-परिवार से जुड़े विवाद इतने बढ़ जाते हैं कि भाई-बहन एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। ऐसे टूटे और उलझे रिश्तों को सुधारने के लिए आजकल 'सिबलिंग थैरेपी' (Sibling Therapy) एक बेहतरीन और असरदार जरिया बनकर उभर रही है।

आखिर क्या है 'सिबलिंग थैरेपी'?

सरल शब्दों में कहें तो सिबलिंग थैरेपी, फैमिली थैरेपी (परिवार की चिकित्सा) का ही एक हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद भाई-बहनों के बीच बातचीत के रास्ते खोलना, पुराने झगड़े मिटाना और एक-दूसरे पर फिर से भरोसा जगाना है।

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इस प्रक्रिया में एक एक्सपर्ट या थेरेपिस्ट दोनों भाई-बहनों को आमने-सामने बिठाकर खुलकर दिल की बात कहने का मौका देता है। यह थैरेपी उन परिवारों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है जहां-

  • भाई-बहनों के बीच हर बात पर झगड़ा होता हो।
  • बातचीत पूरी तरह बंद हो चुकी हो।
  • माता-पिता के तलाक या परिवार में आए किसी बड़े बदलाव के कारण तनाव हो।
  • मम्मी-पापा की बढ़ती उम्र और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी को लेकर झगड़े चल रहे हों।

इस थैरेपी से क्या-क्या फायदे मिलते हैं?

इस थैरेपी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे आपसी बातचीत सुधरती है। थेरेपिस्ट की देखरेख में भाई-बहन एक-दूसरे की बात को गौर से सुनना और सामने वाले के नजरिए को समझना सीखते हैं। इसके अलावा-

पुराने गिले-शिकवे दूर होना: बचपन की कोई ऐसी बात या किसी को यह लगना कि माता-पिता ने उससे ज्यादा भाई या बहन को प्यार दिया, जो सालों से दिल में दबा है- उस पर खुलकर बात करने का सुरक्षित माहौल मिलता है।

मजबूत इमोशनल रिश्ता: इससे आपसी जुड़ाव गहरा होता है। भाई-बहन बुरे वक्त में एक-दूसरे की ढाल बनना सीखते हैं और एक-दूसरे की तरक्की से खुश होना शुरू करते हैं।

पूरे परिवार को सुकून: जब भाई-बहनों की आपसी कड़वाहट कम होती है, तो पूरे घर का माहौल सुधर जाता है और परिवार के बाकी सदस्यों से भी रिश्ते बेहतर होने लगते हैं।

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कैसे होती है यह प्रक्रिया?

थैरेपी के दौरान बातचीत के जरिए व्यवहार को सुधारने और घर पर करने के लिए छोटे-छोटे अभ्यास दिए जाते हैं, ताकि जो बातें सेशन में सीखी गई हैं, उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भी उतारा जा सके।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य किसी को गलत या सही साबित करना बिल्कुल नहीं होता, बल्कि रिश्ते को बचाना होता है। अगर दोनों तरफ से थोड़ी सी कोशिश और सही रास्ता मिल जाए, तो यह थैरेपी सालों पुरानी दूरियों को खत्म कर भाई-बहनों के रिश्ते में फिर से प्यार, सम्मान और भरोसा लौटा सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  29 July 2026, 3:22 PM IST

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