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ऑफिस के पुराने ढर्रे को बदल रही है नई पीढ़ी (Img- AI)
New Delhi: क्या आपने भी अक्सर वरिष्ठों को यह कहते सुना है कि आजकल के बच्चे काम से जी चुराते हैं? अगर हां, तो यह सिर्फ आपके ऑफिस की कहानी नहीं है। कॉरपोरेट जगत में पुरानी पीढ़ी (बूमर्स व मिलेनियल्स) और आज की नई पीढ़ी यानी Gen-Z के बीच सोच का बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। जहाँ पुरानी पीढ़ी के लिए नौकरी का मतलब जिंदगी समर्पित करना था, वहीं नई पीढ़ी के लिए नौकरी सिर्फ लाइफ का एक हिस्सा भर है।
एक हालिया सर्वे के मुताबिक, 74% मैनेजर्स का मानना है कि Gen-Z के साथ काम करना काफी चुनौतीपूर्ण है। वहीं 46% लोग पुरानी पीढ़ी के वर्क एथिक को सबसे बेहतर मानते हैं। लेकिन अमेरिकी लेबर ब्यूरो के आंकड़े अलग ही कहानी बयां करते हैं।
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20 से 24 साल के युवा हफ्ते में औसतन 40.5 घंटे काम कर रहे हैं, जो बाकी उम्रदराज कर्मचारियों के लगभग बराबर है। फर्क काम के घंटों में नहीं, बल्कि काम करने के अंदाज और सोच में है।
आज के युवाओं ने एआई (AI) का बढ़ता दौर, मंदी, लगातार होती छंटनी और महँगाई को बहुत करीब से देखा है। इसी असुरक्षा ने उन्हें सिखाया है कि केवल एक नौकरी के भरोसे अपनी पूरी जिंदगी दांव पर नहीं लगाई जा सकती।
केपीएमजी (KPMG) के सर्वे अनुसार, 47% युवा पार पारंपरिक '9-से-5' वाले ढर्रे को बदलना चाहते हैं। लगभग 46% Gen-Z तनाव से बचने के लिए उन्हीं कंपनियों को चुन रहे हैं, जो मेंटल हेल्थ और वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देती हैं।
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Gen-Z को 'कामचोर' समझना सबसे बड़ी भूल है। आज का युवा एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय है। दिन में 9-से-5 की जॉब करने के साथ-साथ शाम को फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन या अपना साइड बिजनेस संभालना इनके लिए आम बात है। यह पीढ़ी केवल वफादारी के नाम पर ओवरटाइम करने के बजाय अपने काम का सही मोल चाहती है।
Location : New Delhi
Published : 11 August 2026, 3:47 PM IST
Topics : GEN Z Lifestyle News mental health Work Ethic