जब सो रही थी दुनिया, तब जागा भारत: जानिए आखिर क्यों 15 अगस्त की आधी रात को ही मिली हमें आजादी?

15 अगस्त 1947 की आधी रात को ही क्यों आजाद हुआ भारत? जानिए लॉर्ड माउंटबेटन के 'लकी नंबर' 15 अगस्त, द्वितीय विश्व युद्ध के जापान कनेक्शन और बंटवारे के चलते 'ज़ीरो आवर' (रात 12 बजे) पर आजादी के ऐलान के पीछे छिपी पूरी दिलचस्प कहानी।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 August 2026, 1:07 PM IST
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New Delhi: इस साल भारत को आजाद हुए 80 साल पूरे हो चुके हैं और इस लंबे सफर में हमने हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। लेकिन जब भी हम अपने अतीत के पन्नों को पलटते हैं, तो 15 अगस्त 1947 की वह रात आज भी जेहन में तरोताजा हो उठती है। उस आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब भारत अपनी आजादी की एक नई सुबह की पटकथा लिख रहा था।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (नियति से साक्षात्कार) के साथ देश 200 सालों की ब्रिटिश गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर आजाद हुआ। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आजादी का यह ऐतिहासिक जश्न दिन के उजाले में न होकर आधी रात के ठीक 12 बजे (ज़ीरो आवर) पर ही क्यों मनाया गया था? इसके पीछे ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की एक निजी पसंद, ज्योतिषीय गणनाएं और देश की तत्कालीन परिस्थितियां थीं।

लॉर्ड माउंटबेटन के लिए क्यों खास थी 15 अगस्त की तारीख?

जब ब्रिटिश संसद ने भारत को आजाद करने का फैसला लिया, तो गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को तारीख चुनने का अधिकार दिया गया। माउंटबेटन अंधविश्वासी थे और 15 अगस्त को अपना 'लकी डे' मानते थे। इसकी वजह यह थी कि 15 अगस्त 1945 को ही द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने माउंटबेटन की कमान वाली 'अलाइड फोर्सेज' के सामने आत्मसमर्पण किया था। अपनी इस पुरानी जीत की वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए ही माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त का दिन तय किया।

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आधी रात को ही आजादी का ऐलान क्यों?

तारीख तो तय हो गई, लेकिन वक्त को लेकर कई तकनीकी और राजनीतिक पेच फंस गए थे। सबसे बड़ा कारण था भारत-पाकिस्तान का बंटवारा। लॉर्ड माउंटबेटन को 14 अगस्त को कराची जाकर पाकिस्तान को सत्ता सौंपनी थी और फिर उसी रात नई दिल्ली लौटना था। ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक प्लान के मुताबिक दोनों देशों को 15 अगस्त 1947 की शुरुआत यानी 14 और 15 अगस्त के बीच की 'ज़ीरो आवर' (रात 12 बजे) पर आजाद होना था।

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दंगे और अव्यवस्था का डर भी था बड़ा कारण

आधी रात का समय चुनने का एक व्यावहारिक कारण सुरक्षा भी था। ब्रिटिश हुकूमत और भारतीय नेताओं को इस बात का डर था कि अगर दिन के उजाले में बंटवारे और आजादी की घोषणा होती, तो दोनों देशों में भयंकर सांप्रदायिक दंगे भड़क सकते थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को संभालना मुश्किल हो जाता। यही वजह थी कि रात के सन्नाटे में सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

Location :  New Delhi

Published :  9 August 2026, 1:07 PM IST

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