हिंदी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Image Source: Google)
New Delhi: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच तनाव अब खुलकर सामने आने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को NATO देशों पर जमकर निशाना साधा और उन्हें कायर तक कह दिया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि NATO सहयोगी तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत तो कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने और ईरान के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर खुलकर साथ देने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने पोस्ट में NATO को अमेरिका के बिना "paper tiger" यानी कागजी शेर बताया।
ट्रंप की नाराजगी की बड़ी वजह यह है कि कई NATO देशों ने ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता था कि उसके सहयोगी कम से कम होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारी जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात करें, लेकिन कई देशों ने या तो साफ इनकार कर दिया या कहा कि वे केवल युद्धविराम की स्थिति में समुद्री सुरक्षा में मदद पर विचार करेंगे। ट्रंप ने इसी रुख को निशाना बनाते हुए कहा कि अमेरिका के सैन्य अभियान के बाद खतरा घट चुका है, फिर भी सहयोगी केवल तेल महंगा होने की शिकायत कर रहे हैं।
नासिक ज्योतिषी कांड में गिरी गाज, महिला आयोग अध्यक्ष रुपाली चाकणकर ने छोड़ा पद; पढ़ें पूरी खबर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, यह वैश्विक तेल सप्लाई के लिए एक बेहद अहम चोकपॉइंट है और हाल के वर्षों में इससे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा संघर्ष के दौरान इस जलमार्ग पर खतरा बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में जोरदार उछाल आया है। कुछ रिपोर्टों में 40 से 50 फीसदी तक कीमतें बढ़ने की बात कही गई है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
NATO ने सीधे तौर पर ट्रंप की भाषा पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन संगठन ने इराक में अपने मिशन की स्थिति में बदलाव की पुष्टि की है। NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि संगठन इराक मिशन के संदर्भ में अपनी स्थिति एडजस्ट कर रहा है और सहयोगियों व भागीदारों के साथ समन्वय जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। दूसरी ओर, यह भी सामने आया है कि NATO का इराक मिशन अब यूरोप के नेपल्स मुख्यालय से संचालित किया जा रहा है। इससे साफ है कि गठबंधन फिलहाल सीधे युद्ध में कूदने से बचते हुए अपनी सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
UP Crime: गोरखपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई…टोल बचाने के खेल पर पुलिस का बड़ा वार, जानें पूरी खबर?
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और उसके पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों के बीच भरोसे और रणनीति के फर्क को फिर उजागर कर दिया है। एक तरफ ट्रंप खुली सैन्य भागीदारी चाहते हैं, दूसरी तरफ यूरोपीय सहयोगी सीधे युद्ध में उतरने से हिचक रहे हैं। ऐसे में ईरान युद्ध अब सिर्फ मध्य पूर्व का संघर्ष नहीं, बल्कि पश्चिमी गठबंधन की एकता की भी बड़ी परीक्षा बनता दिख रहा है।
Location : New Delhi
Published : 20 March 2026, 11:29 PM IST