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ईरान-युद्ध का असर (Google Image)
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष ने वैश्विक समुद्री व्यापार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। होर्मुज, लाल सागर और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर असुरक्षा बढ़ने के बाद जहाज कंपनियों को अपना रूट बदलना पड़ा है, जिससे समय और लागत दोनों में भारी वृद्धि हुई है।
यह बदलाव पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल और यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़े तनाव के बाद तेज हुआ। खासकर लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षित लेकिन लंबे रास्तों का चयन शुरू किया।
पहले एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का मुख्य रास्ता स्वेज नहर था, जहां से जहाज लगभग 18 दिन में माल पहुंचा देते थे। लेकिन अब लगभग 70% मालवाहक जहाज अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ मार्ग से जा रहे हैं, जिससे यात्रा 50 से 55 दिन तक पहुंच गई है।
लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले और अस्थिरता के कारण जहाजों की सुरक्षा खतरे में आ गई है। इसी वजह से कंपनियां स्वेज नहर से बच रही हैं। होर्मुज जलमार्ग भी तनाव के कारण लगभग बाधित हो गया है, जिससे तेल और व्यापार दोनों पर असर पड़ा है।
लंबे रूट के कारण जहाजों को 2 हफ्ते अतिरिक्त समय लग रहा है। साथ ही ईंधन खर्च 30% से 50% तक बढ़ गया है। निरंतर सप्लाई बनाए रखने के लिए 10-20% ज्यादा जहाजों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ गया है।
इजिप्ट को स्वेज नहर से मिलने वाली आय में भारी गिरावट आई है। 2024 में उसका राजस्व 2023 की तुलना में लगभग 60% घट गया। वहीं अफ्रीका के कुछ पोर्ट्स को फायदा हुआ है, जैसे मोरक्को का टैंगियर मेड पोर्ट, जहां कंटेनर हैंडलिंग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सऊदी अरब का जेद्दा पोर्ट भी नए लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है, जहां से माल सड़क मार्ग के जरिए खाड़ी देशों तक पहुंचाया जा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 3 May 2026, 9:15 AM IST