The Candid Talk: कैंसर को लेकर बड़ा मिथक टूटा, विशेषज्ञ ने समझाया बायोप्सी, इलाज और पहचान का सही समय

डाइनामाइट न्यूज़ के खास पॉडकास्ट में हेड और नेक कैंसर पर विशेषज्ञ डॉ तपस्विनी प्रधान ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तंबाकू, अल्कोहल और खराब लाइफस्टाइल इसके बड़े कारण हैं। समय पर पहचान, सही इलाज और जागरूकता से इस बीमारी से बचाव संभव है।

Post Published By: Manoj Tibrewal Aakash
Updated : 3 May 2026, 9:06 AM IST
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New Delhi: डाइनामाइट न्यूज़ के चर्चित पॉडकास्ट The Candid Talk में इस बार एक बेहद गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारी- हेड और नेक कैंसर पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के होस्ट मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने देश की जानी-मानी हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ तपस्विनी प्रधान से इस विषय पर गहन बातचीत की। इस चर्चा में कैंसर के कारण, लक्षण, मिथक, इलाज और बचाव के तरीकों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।

क्या होता है हेड और नेक कैंसर?

डॉ. प्रधान ने बताया कि हेड और नेक कैंसर कई प्रकार के कैंसर का समूह है, जो कॉलरबोन के ऊपर के हिस्से में विकसित होता है। इसमें मुंह, गला, नाक, साइनस, थायरॉयड, लार ग्रंथियां और सांस की नली तक शामिल हैं। हर प्रकार का कैंसर अलग तरह से व्यवहार करता है और उसका इलाज भी अलग होता है।

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भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले

भारत में यह कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। पुरुषों में यह सबसे आम कैंसर है, जबकि महिलाओं में चौथे स्थान पर आता है। खासतौर पर ओरल कैंसर के मामलों में भारत को "ग्लोबल कैपिटल" कहा जाता है, जहां दुनिया के लगभग 33% केस पाए जाते हैं।

बायोप्सी को लेकर बड़ा भ्रम

एक आम मिथक है कि बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है। डॉक्टर ने इसे पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि सही निदान के लिए बायोप्सी जरूरी है और इससे बीमारी फैलती नहीं है।

मुख्य कारण और जोखिम

हेड और नेक कैंसर के 80-90% मामले तंबाकू सेवन से जुड़े हैं- चाहे वह धूम्रपान हो या चबाने वाला तंबाकू। इसके अलावा अल्कोहल, सुपारी, पान मसाला, वायरस (HPV, EBV), खराब डाइट, प्रदूषण और कुछ उद्योगों में काम करने वाले लोगों में भी जोखिम अधिक होता है।

शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी

मुंह में न भरने वाला घाव, असामान्य गांठ, दांतों का हिलना, मुंह न खुलना, आवाज में बदलाव या निगलने में दिक्कत जैसे लक्षण शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यदि ये 2-3 हफ्तों में ठीक न हों तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

सफेद और लाल धब्बे कब खतरनाक?

मुंह में लंबे समय तक रहने वाले सफेद (ल्यूकोप्लाकिया) या लाल (एरिथ्रोप्लाकिया) धब्बे कैंसर का रूप ले सकते हैं, खासकर अगर दवाओं से ठीक न हों। ऐसे मामलों में बायोप्सी जरूरी हो जाती है।

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आवाज बैठना और गले में दर्द

अगर आवाज 4-6 हफ्तों तक ठीक न हो या लगातार गले में दर्द रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि हर बार यह कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच जरूरी है।

युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा

पहले यह बीमारी 60-70 वर्ष की उम्र में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब बदलती जीवनशैली और आदतों के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

इलाज और नई तकनीक

डॉक्टर के अनुसार, हेड और नेक कैंसर में सर्जरी मुख्य इलाज है, लेकिन कुछ मामलों में रेडिएशन और कीमोथेरेपी भी प्रभावी होती हैं। रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों से इलाज आसान और कम दर्दनाक हो गया है।

मानसिक और सामाजिक प्रभाव

यह कैंसर सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। चेहरे में बदलाव, बोलने और खाने में दिक्कत मरीज के लिए चुनौती बन जाती है।

सबसे बड़ी गलती- लक्षणों को नजरअंदाज करना

डॉ. प्रधान ने कहा कि मरीजों की सबसे बड़ी गलती है शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना, जिससे इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है।

लाइफस्टाइल और डाइट का महत्व

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर 40-50% कैंसर से बचा जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव से दूरी और अच्छी नींद बेहद जरूरी है। फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड को कम करना चाहिए।

परिवार का सहयोग जरूरी

कैंसर से लड़ाई में परिवार और दोस्तों का सहयोग मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। सपोर्ट ग्रुप्स भी मरीजों के लिए मददगार साबित होते हैं।

इस चर्चा से साफ है कि हेड और नेक कैंसर एक गंभीर लेकिन काफी हद तक रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर पहचान, सही इलाज और जागरूकता से इस पर काबू पाया जा सकता है। डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है।

Location :  New Delhi

Published :  3 May 2026, 9:06 AM IST

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