Ayodhya Ram Mandir: ट्रस्ट के महासचिव पद से हटने के बाद भी पर्दे के पीछे से मंदिर के फैसले तय कर रहे हैं चंपत राय? जानिए कनेक्शन

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिए एक महीना बीतने के बाद भी चंपत राय अयोध्या में सक्रिय हैं। मंदिर प्रबंधन में उनकी भूमिका और ट्रस्ट के लोगों से उनकी लगातार हो रही मुलाकातों ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Updated : 9 August 2026, 2:45 PM IST
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Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से हटने के बाद भी चंपत राय सुर्खियों में बने हुए हैं। पद छोड़ने को लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन उनका अयोध्या से मोह और मंदिर प्रबंधन में उनका प्रभाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। भले ही उन्होंने औपचारिक पद से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी सक्रियता और मंदिर के मामलों में उनकी मजबूत पकड़ अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

पद छोड़ने के बाद भी ट्रस्ट के फैसलों में सलाह का दौर

ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिए हुए करीब एक महीना हो गया है, मगर चंपत राय अभी तक अयोध्या में ही डेरा डाले हुए हैं। आधिकारिक पद पर न होने के बावजूद मंदिर प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में उनकी दखलअंदाजी और सक्रियता लगातार बनी हुई है। ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य अभी भी नियमित रूप से उनसे मुलाकात कर रहे हैं और विभिन्न मामलों पर उनका मार्गदर्शन ले रहे हैं।

अंतरिम महासचिव भी ले रहे हैं मार्गदर्शन

सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन भी लगातार चंपत राय के संपर्क में हैं। मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई अहम मामलों में फैसलों से पहले कृष्ण मोहन उनकी सलाह ले रहे हैं। इतना ही नहीं, यह भी चर्चा है कि कई मामलों में उनकी हरी झंडी मिलने या सलाह के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जा रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर ट्रस्ट की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई बयान या जानकारी साझा नहीं की गई है।

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वीएचपी नेता की मुलाकात और नए नाम पर चर्चा

हालांकि चंपत राय खुद मंदिर परिसर जाने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन उनसे मिलने वालों का तांता लगा हुआ है। हाल ही में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा अयोध्या पहुंचे और उन्होंने चंपत राय से लंबी मुलाकात की। राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में बजरंग लाल बांगड़ा का नाम ट्रस्ट के नए महासचिव पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। ऐसे में उनकी चंपत राय से यह मुलाकात बेहद रणनीतिक और अहम मानी जा रही है।

एसआईटी जांच और क्लीनचिट की उम्मीद

चोरी के इस पूरे मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय का सीधा नाम शामिल नहीं था। हालांकि, रिपोर्ट में यह जरूर दर्ज किया गया था कि इस व्यवस्था से जुड़े सभी पदाधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी के दायरे में आते हैं। सूत्रों का कहना है कि जैसे ही एसआईटी की विस्तृत और अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आएगी, चंपत राय को पूरी तरह से क्लीनचिट मिलने की संभावना है। खुद चंपत राय को भी इस बात की पूरी उम्मीद है और उन्होंने अपने कुछ बेहद करीबी लोगों के सामने इस बात की चर्चा भी की है।

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नए नेतृत्व पर मंथन और भविष्य के सवाल

एक तरफ जहां ट्रस्ट के भीतर नए महासचिव के नाम को लेकर बैठकों और मंथन का दौर जारी है, वहीं बजरंग लाल बांगड़ा का अयोध्या आकर चंपत राय से मिलना इस प्रक्रिया को और हवा दे रहा है। कुल मिलाकर, आधिकारिक तौर पर पद छोड़ने के बाद भी अयोध्या में चंपत राय की मौजूदगी और ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों से लगातार हो रही उनकी मुलाकातों ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मंदिर के प्रशासनिक मामलों में उनकी वास्तविक और नैतिक भूमिका अभी कितनी बाकी है।

Location :  Ayodhya

Published :  9 August 2026, 2:44 PM IST

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