Ayodhya: बैंक को 3 महीने पहले ही लग गई थी चोरी की भनक, हटाने वाले थे चोरों को; फिर किसने बचाई उनकी नौकरी और क्यों आया इस्तीफा?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में खुलासा हुआ है कि एसबीआई ने तीन महीने पहले ही संदिग्ध कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन चंपत राय और अनिल मिश्रा उनके पक्ष में ढाल बन गए। भारी जन-आक्रोश और चौतरफा दबाव के बाद दोनों ने इस्तीफा दे दिया है, जिस पर फैसला होना अभी बाकी है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 June 2026, 10:53 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर में हुए महापाप यानी चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और शर्मनाक खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खूनी खेल और धोखाधड़ी में नया मोड़ यह आया है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को करीब तीन महीने पहले ही इस बड़ी हेराफेरी की भनक लग गई थी। बैंक प्रबंधन ने संदिग्ध कर्मचारियों को तुरंत हटाने की सिफारिश भी की थी, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी ही उन चोरों के लिए मजबूत ढाल बनकर खड़े हो गए।

बैंक की सिफारिश और ट्रस्ट के पदाधिकारियों की 'ढाल'

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसबीआई बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी को दान के पैसों की गिनती के दौरान कुछ गंभीर वित्तीय गड़बड़ी का अंदेशा हुआ था। इसके बाद उन्होंने करीब तीन महीने पहले एक रूटीन प्रक्रिया का हवाला देते हुए सभी गणना कर्मियों को बदलने की तैयारी शुरू कर दी थी। आउटसोर्सिंग कंपनी भी इन कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने वाली थी, लेकिन जैसे ही इसकी भनक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव को लगी, उन्होंने बैंक अधिकारियों के इस फैसले पर तुरंत अड़ंगा लगा दिया।

बैंक की सैलरी पर पल रहे थे ट्रस्टियों के करीबी रिश्तेदार

जांच में यह भी सामने आया है कि गणना प्रक्रिया में शामिल अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, अवनीश और करुणेश शुक्ला जैसे तमाम कर्मियों की भर्ती एक आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कराई गई थी। लेकिन असलियत यह थी कि ये सभी कर्मचारी ट्रस्ट के रसूखदार पदाधिकारियों के सगे-संबंधी और बेहद करीबी थे। यानी साधारण शब्दों में कहें तो इन कर्मचारियों को सैलरी तो सरकारी बैंक दे रहा था, लेकिन ये वफादारी ट्रस्ट के उन पदाधिकारियों के प्रति निभा रहे थे जो इन्हें बचा रहे थे।

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नहीं हटे कर्मचारी तो बढ़ गया मनोबल, पार की बड़ी रकम

जब बैंक के पुरजोर विरोध के बावजूद इन कर्मचारियों को हटाया नहीं गया, तो उनके हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए। उन्हें इस बात का पूरा भरोसा हो गया कि ट्रस्ट के बड़े नाम उनके पीछे खड़े हैं और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसी अति-आत्मविश्वास के चलते उन्होंने पहले से भी बड़े पैमाने पर दान राशि की चोरी करना शुरू कर दिया और भारी-भरकम रकम को ठिकाने लगाने में जुट गए।

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इस्तीफे पर तत्काल फैसला क्यों नहीं? उठ रहे गंभीर सवाल

इस महाघोटाले और चोरी का भंडाफोड़ होने के बाद चौतरफा फजीहत झेल रहे चंपत राय और अनिल मिश्रा ने आखिरकार दबाव में आकर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इनके इस्तीफे को मंजूर नहीं किया गया है और यह दलील दी जा रही है कि इस पर अंतिम फैसला आगामी बैठक में होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में तत्काल कड़ी कार्रवाई करने के बजाय ट्रस्ट बैठक का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या इसके पीछे मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोई नई रणनीति है?

Location :  Ayodhya

Published :  29 June 2026, 10:53 AM IST

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