Oil Price Hike: ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच कच्चा तेल $156.29 प्रति बैरल, भारत पर बढ़ा दबाव

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 156.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं,

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 20 March 2026, 2:12 PM IST
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New Delhi: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 156.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पिछले कई वर्षों का उच्च स्तर माना जा रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल मुख्य रूप से आपूर्ति बाधित होने की आशंका और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण आया है। खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर तनाव बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।

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तेल कीमतों का भारत पर असर

भारत, जो अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। तेल की कीमतों में इस तेजी का असर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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सरकार पहले ही आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत निगरानी बढ़ा चुकी है और तेल-गैस कंपनियों को डेटा साझा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।

बढ़ेगा तेल संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने या रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आयात और महंगा हो सकता है।

आम जनता पर असर

उधर, आम जनता के लिए इसका सीधा असर LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है। परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

फिलहाल, बाजार और सरकार दोनों की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी है। आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं, यह तय करेगा कि ऊर्जा संकट कितना गहराता है और इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना व्यापक होगा।

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  • New Delhi

Published : 
  • 20 March 2026, 2:12 PM IST

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