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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना भेजने से इनकार किया है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।
डोनाल्ड ट्रम्प (Image source: Google)
New Delhi: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। जहां एक ओर ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की भारी फंडिंग की मांग कर दी है। इन घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि यह संघर्ष आने वाले समय में और भी गंभीर रूप ले सकता है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने मध्य ईरान के आसमान में अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया है। ईरान के अनुसार, हमले के बाद विमान का भविष्य स्पष्ट नहीं है, लेकिन उसके गिरने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट एक कॉम्बैट मिशन पर था और तकनीकी कारणों से उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
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इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने कांग्रेस से 200 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है। यह राशि ईरान के साथ संभावित लंबे संघर्ष को ध्यान में रखते हुए मांगी गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि बुरे लोगों को खत्म करने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है और इसके लिए सरकार कांग्रेस से सहयोग मांग रही है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इस रकम की पुष्टि नहीं की, लेकिन फंडिंग के अनुरोध को स्वीकार किया।
यह कदम दर्शाता है कि अमेरिका इस संघर्ष को गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
ट्रंप का बयान और वैश्विक प्रतिक्रिया
तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल किसी भी देश में अमेरिकी सेना भेजने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई निर्णय लिया भी जाता है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
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वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा।
इस बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखने के लिए सहयोग की बात कही है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में से एक है।
मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम होने वाला नहीं है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।