बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान बन रहा है? शेख हसीना के बेटे के बयान से भारत तक क्यों बढ़ी चिंता

दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं शेख हसीना और उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर कई गंभीर दावे किए। आतंकवाद, कानून व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और भारत की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों ने नई बहस छेड़ दी है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 6 August 2026, 11:46 AM IST
google-preferred

Dhaka: करीब दो साल तक सार्वजनिक मंचों से दूर रहने के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पहली बार दुनिया के सामने आईं। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने अपने देश की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं उनके बेटे और पूर्व आईसीटी सलाहकार सजीब वाजेद जॉय के एक बयान ने पूरे दक्षिण एशिया में नई चर्चा शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब "दूसरा पाकिस्तान" बनने की दिशा में बढ़ रहा है और इसका असर भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

दो साल बाद पहली बार सामने आईं शेख हसीना

नई दिल्ली में आयोजित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया के कार्यक्रम में शेख हसीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया। सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में ऐसे लोगों को रिहा किया गया है जिन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। उनके मुताबिक इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है।

‘कदम रखा तो सीधे फंदे पर लटकेंगी!’ शेख हसीना की वापसी की खबर पर नाहिद इस्लाम की खुली धमकी

बेटे ने भारत की सुरक्षा का भी किया जिक्र

सजीब वाजेद जॉय ने कहा कि मौजूदा हालात सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं हैं। उनका दावा था कि यदि कट्टरपंथ और अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर पड़ोसी देशों, खासकर भारत पर भी पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और देश धीरे-धीरे अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

राजनीतिक हिंसा और मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

जॉय ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी पुलिस हिरासत में मौतों का सिलसिला नहीं रुका। उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों के सरकारी और अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों में अंतर पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

पुराने आतंकी मामलों को फिर किया याद

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व बांग्लादेशी राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने 21 अगस्त 2004 के ग्रेनेड हमले और चटगांव में पकड़ी गई 10 ट्रक हथियारों की खेप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं इस बात का संकेत थीं कि बांग्लादेश का इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि आज भी कट्टरपंथ के खतरे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

क्या भारत से राजनीति करेंगी शेख हसीना? मोदी सरकार ने थरूर समिति को दिया ये दो टूक जवाब

2004 के केस से 2025 तक का सफर

चटगांव हथियार बरामदगी मामले की दोबारा जांच 2009 में शुरू हुई थी। इसके बाद 2018 में अदालत ने तत्कालीन गृह मंत्री लुत्फोज्जमान बाबर को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि जनवरी 2025 में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, जिससे यह मामला फिर चर्चा में आ गया।

बयानों ने बढ़ाई नई राजनीतिक बहस

शेख हसीना और उनके बेटे के इन दावों ने बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति, कानून व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि इन आरोपों पर बांग्लादेश की वर्तमान सरकार की ओर से अलग रुख सामने आता रहा है। ऐसे में इन दावों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा का अहम विषय बन सकता है।

Location :  Dhaka

Published :  6 August 2026, 11:46 AM IST

Related News

Advertisement