हिंदी
New Delhi: सऊदी अरब और यमन के हुती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद खौफनाक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अभा, खमीस मुशैत, जिजान और नज़रान जैसे कई इलाकों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 73 लोग घायल हुए हैं। तेल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई ठिकानों पर भयंकर आग लग गई, जिसके चलते रिफाइनरी के कुछ ऑपरेशन्स को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
सऊदी अरब ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए हुतियों को कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं दूसरी ओर, 19 सितंबर को हुतियों ने राजधानी रियाद में भी संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया था, जिसे सऊदी रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
इस बढ़ते सैन्य टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भारी दबाव बन गया है।
मिडिल ईस्ट में भड़कते इस तनाव के बीच ब्रिटेन ने सऊदी अरब के समर्थन में बड़ा कदम उठाया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि हुती विद्रोहियों से निपटने के लिए ब्रिटेन, सऊदी अरब को सीमित सैन्य सहायता देगा।
इसके तहत ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स (RAF) सऊदी लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन भरने (Air-to-Air Refuelling) की सुविधा प्रदान करेगी। ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि यह सहायता मुख्य रूप से सऊदी अरब के रक्षात्मक अभियानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
Location : New Delhi
Published : 22 September 2026, 3:52 PM IST