हिंदी
भारत में FCRA संशोधनों पर अमेरिकी सांसद राइली मूर ने जताई चिंता(सोर्स-Pinterest)
New Delhi: भारत में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए (FCRA) के नियमों में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अमेरिका में सियासी हलचल तेज हो गई है। वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इन संशोधनों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इस कदम से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह पूरा मामला गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी फंड से जुड़ा हुआ है।
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए भारत के इस कदम को ईसाई समुदाय पर एक स्पष्ट हमला करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में भारत में ईसाई धर्म के लंबे इतिहास का हवाला दिया। मूर ने लिखा कि प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों के भीतर संत थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंच गए थे, और तब से ही देश में ईसाइयों का एक समृद्ध इतिहास रहा है।
सांसद मूर का मुख्यतयः यह तर्क है कि भारतीय संसद द्वारा एफसीआरए नियमों में जो नए बदलाव विचाराधीन हैं, वे सरकार को सीधे तौर पर चर्चों और अन्य धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन अपने नियंत्रण में लेने की अनुमति दे देंगे। इसी आशंका के चलते उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह संशोधन लागू किए जाते हैं, तो इसका असर दोनों देशों के आपसी संबंधों पर भी पड़ सकता है। वर्तमान में दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
Location : New Delhi
Published : 5 August 2026, 3:36 PM IST
No related posts found.